लंदन. गुस्से से किसी भी चोट से लगा जख्म भी देर से भरता है। कोलंबस की ओहियो यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओ ने गुस्से या झल्लाहट के नाकारात्मक प्रभाव के बार में पता किया है। डेली टेलीग्राफ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्चरों ने 100 से भी ज्यादा लोगों पर स्टडी के बाद ये निष्कर्ष निकाले हैं।
साइंटिस्ट देखना चाहते थे कि अगर मानसिक अवस्था का शरीर से गहरा संबंध है, तो चोट लगने पर चलने वाले हीलिंग प्रोसेस से भी इसका कोई कनेक्शन होगा। इसकी जांच के लिए वालंटियर्स के कम यूज वाले हाथ पर वैक्यूम पंप से फोफले की तरह के घाव किए गए। इसके बाद अगले आठ दिनों तक इन घावों के भरने की निगरानी की गई। इन दौरान मानसिक तनाव या गुस्से में रिसने वाले स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टीसोल के लेवल की भी जांच की गई।
इस दौरान वालंटियर्स को आने वाले गुस्से के हिसाब से उनका कैटिगराइजेशन करने के लिए भी एक मानक बनाया गया। इस पूरी कवायद के बाद नतीजा निकला कि जो लोग अपने एक्सप्रेशन पर काबू नहीं रख पाते हैं, उनका घाव नॉमर्ल लोगों की तुलना में 4.2 गुना ज्यादा टाइम में भरता है। नतीजे बताते हैं कि जो लोग अपनी मानसिक शांति को संभाल कर नहीं रखते हैं उनके शरीर में कोर्टीसोल ज्यादा निकलता है। यह हॉर्मोन घाव भरने के प्रोसेस को धीमा कर देता है।
इस स्टडी से जुड़े लीड रिसर्चर जीन फिलिपे ने कहा है कि गुस्से और हीलिंग का कनेक्शन आदमी पर डिपेंड करता है। यानी जिन लोगों को स्ट्रेस मैनेजमेंट आता है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस दिलचस्प स्टडी के नतीजे ब्रेन बिहेवियर एंड इम्यूनिटी नाम के जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।