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रोज निराश लौट रहे हजारों लोग

बिलासपुर. strike पटवारियों की प्रदेश स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल ने एक दर्जन कार्यो पर रोक लगा दी है। कहने को तो हड़ताल पटवारियों की है, लेकिन इसकी जल्द समाप्ति के लिए आम नागरिक भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार हड़ताल के अभी समाप्त होने के दूर तक आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। विभिन्न मांगों को लेकर पटवारियों ने दस दिनों से हड़ताल की जा रही है। जिले में करीब 240 पटवारी हैं, जो विभिन्न मांगों को लेकर राज्य स्तरीय हड़ताल में कूद गए हैं।

इसके चलते राजस्व संबंधी कार्य ठप हो गए हैं। मांगें पूरी कराने पटवारियों द्वारा शासन से लगातार चर्चा की जा रही है। जानकारी के अनुसार अभी हड़ताल के समाप्त होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।

इधर जिले में बिलासपुर, पेंड्रा, पथरिया, तखतपुर सहित 11 तहसील तो सीपत, बिल्हा, रतनपुर, सकरी सहित आधा दर्जन से भी अधिक उपतहसील कार्यालय हैं। इन तहसील कार्यालयों में फार्म-22, खसरा, बी-वन सहित रजिस्ट्री संबंधी कई कार्य नहीं हो पा रहे हैं। जानकारों का अनुमान है कि हड़ताल की वजह से छात्र-छात्रा, किसान, ग्रामीण, जमीन की खरीदी-बिक्री करने वाले दलाल को मिलाकर अनुमान है कि रोज करीब 10 हजार लोग तहसील कार्यालयों से वापस लौटना पड़ रहा है।

बिलासपुर तहसील कार्यालय के अंतर्गत बड़ा क्षेत्र होने के कारण परेशानी अधिक हो रही है। बेलतरा, रमतला, गतौरी, मदनपुर, बाम्हू, सेलर, लालखदान, तिफरा, देवरीखुर्द, कछार, कोनी, खमतराई, बहतराई, सिरगिट्टी, मंजूरपहरी सहित कई ग्राम पंचायत व कुल 22 हलकों का कार्य यहां से होता है।

बेक डेट में फार्म-22 दे रहे पटवारी: रजिस्ट्री के लिए फार्म 22 अति आवश्यक है। इस बात की जानकारी जमीन की खरीदी व बिक्री करने वालों को है। नियमानुसार हड़ताल के चलते पटवारी फार्म 22 नहीं दे सकते, लेकिन जानकारी के अनुसार कुछ पटवारी मोटी रकम लेकर बेक डेट में फार्म 22 दे रहे हैं। इसकी जानकारी होने पर पटवारी संघ के अध्यक्ष ने दोषी पटवारियों से फार्म 22 अपने पास जमा करा लिया है। हड़ताल समाप्त होने के बाद उनके फार्म उन्हें वापस किए जाएंगे।

>> पटवारियों के हड़ताल पर चले जाने से खासतौर पर ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। खसरा, बी-वन, फार्म-22 सहित कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
संजय अग्रवाल, एसडीएम

>> पटवारियों द्वारा की जा रही हड़ताल से जमीन की खरीदी-बिक्री नहीं हो पा रही है, जबकि छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति, जाति, निवास, आमदनी प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। कोर्ट केस भी आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
पीसी कोरी, नायब तहसीलदार

कइसे होही बिहाव?
गांवों में लड़कियों की ज्यादातर शादियां जमीन बेचकर की जाती है। पटवारियों की हड़ताल के कारण ऐसे अभिभावक परेशान हैं। कइयों के पुत्रियों की शादी तय हो चुकी है, लेकिन जमीन की बिक्री नहीं होने से उन्हें अब इस कार्य में विघ्न होने का खतरा महसूस होने लगा है। पौसरा के राधेश्याम सूर्यवंशी ने बताया कि उसकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, रामनवमी में उसके पुत्री की शादी होनी है। उसे डर है कि कहीं बेटी की शादी न रुक जाए।





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