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कोशिशें नाकाम, अंतत: घायल बाघ की मौत

भोपाल. राजधानी के नेशनल पार्क वन विहार में पन्ना से इलाज के लिए लाए गए बाघ की आखिरकार शुक्रवार की शाम को मौत हो गई। इसे बचाने की वन विहार प्रबंधन की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। वन्य प्राणी और पशु चिकित्सकों ने इस दस वर्षीय बाघ का मंगलवार की शाम ऑपरेशन कर शरीर से गोली निकाल दी थी।

पशु चिकित्सकों का कहना था कि बाघ की रीढ़ की हड्डी में गोली लगने के कारण पांव में लकवा मार गया था। उसके चल पाने की संभावना कम जताई जा रही थी। शनिवार की सुबह बाघ का अंतिम संस्कर किया जाएगा। बाघ के गंभीर होने की सूचना मिलने के बाद वन मंत्री विजय शाह समेत वन विभाग के अनेक अधिकारी भी शाम को वन विहार पहुंचे।

रीढ़ की हड्डी में हो गया था जख्म

जानकारी के मुताबिक वन विहार में बाघ को प्रतिबंधित क्षेत्र में रखा गया था। आपरेशन के बाद से उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था, लेकिन शुक्रवार की दोपहर वह सुस्त दिखाई दिया। वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया तो हालत गंभीर दिखी। इसके बाद राज्य पशु चिकित्सालय के डॉ. एएस परिहार और डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने भी उसका इलाज किया, पर उसे बचाया नहीं जा सका।

डॉ. गुप्ता का कहना है कि बाघ के शरीर में गोली काफी अंदर तक पहुंच गई थी। इससे रीढ़ की हड्डी में जख्म हो गया था। उसकी मौत का वास्तविक कारण उसके अंगों की जांच रिपोर्ट में सामने आएगा। गौरतलब है कि सतना के जंगल में घायल अवस्था में मिले इस बाघ को पन्ना ले जाया गया था और वहां से सोमवार को वन विहार लाया गया था। वन विहार में दिसंबर और अक्टूबर में भी दो युवा बाघों की मौत हो चुकी है।





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