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बिजली अमले की मांग हमारी सजा भी माफ हो

सारनी. किसानों पर बकाया बिजली बिलों में माफी के सरकार के एलान के बाद वसूली में लगे बिजली विभाग के अमले के तेवर तीखे नजर आ रहे हैं। किसानों से वसूली नहीं कर पाने की स्थिति में सैकड़ों अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस, वेतन वृद्धि रोकने, निलंबन और विभागीय जांच जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। किसानों को माफी के बाद अब बिजली अमला भी सजा में माफी चाह रहा है। इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री से मांग की गई है।

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ३५क् सब डिवीजन और १२४२ वितरण केंद्र हैं। इसमें विद्युत वितरण की तीन कंपनियों के ढाई हजार कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता पदस्थ हैं। चार सालों में बकाया वसूली में तीनों कंपनियों ने विशेष ध्यान देते हुए तीन सौ करोड़ के राजस्व को सात सौ करोड़ तक पहुंचाया है। मप्र विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ के प्रांतीय महासचिव डीके वैष्णव के मुताबिक वसूली कमजोर पाए जाने पर करीब १५ सौ कनिष्ठ और सहायक अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वसूली के दौरान करीब १२ सौ इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस थमाए गए हैं।

करीब डेढ़ सौ पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। वहीं सैकड़ों की वेतनवृद्धि रोकी गई है। श्री वैष्णव के अनुसार एक-एक अभियंता को चार से पांच बार कारण बताओ नेाटिस का सामना करना पड़ा है। यही नहीं किसानों से वसूली के दौरान विवाद की स्थिति और थाने में एफआईआर तक का सामना करना पड़ा है। पदाधिकारियों के मुताबिक ऐसी स्थिति में अभियंताओं और अन्य कर्मचारियों की सीआर प्रभावित हुई है।

अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर किसानों की बिल माफी का स्वागत किया है, साथ ही वसूली के दौरान बिजली अमले पर हुई कार्रवाई को माफ करने की मांग रखी है। संघ ने इसके लिए १५ मार्च तक का समय दिया है, माफी नहीं मिली तो बाद में आंदोलन की चेतावनी दी है।

एई के साढ़े बारह सौ पद रिक्त: प्रदेश में बिजली उत्पादन और वितरण के काम में लगी कंपनियों में सहायक यंत्रियों के करीब साढ़े बारह सौ पद खाली हैं। कनिष्ठ यंत्री को कार्यपालन यंत्री का वेतन दिया जा रहा है। अभियंता संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि यदि १५ वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कनिष्ठ यंत्रियों को पदोन्नति दी जाए तो मंडल पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

यह विभाग स्तर का मामला नहीं है। वसूली का काम कंपनियों का है, एम्प्लाई भी कंपनियों के ही हैं, कंपनियों के सीएमडी इस संबंध में निर्णय के अधिकार रखते हैं।

-आरपी अग्रवाल, अतिरिक्त सचिव ऊर्जा विभाग





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