हेल्थ.
जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में से बुढ़ापा भी एक है। अधिकतर लोगों में यह भ्रांति है कि बुढ़ापा मतलब सिर्फ बीमारियां और परेशानियां। दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धावस्था उन्हीं लोगों के लिए दुखदाई और परेशानी भरा होती है, जिनका यौवन अनियमित और व्यायाम रहित होता है। संतुलित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति 100 वर्षो तक जीवित रह सकता है।
कहा जाता है ‘आज जो बोओगे, कल वैसा ही पाओगे’। यह सिद्धांत जीवन में अन्य कई क्षेत्रों के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी लागू होता है। संकेत स्पष्ट हैं कि यदि आप अपने बुढ़ापे को स्वस्थ और सुखमय बनाना चाहते हैं, तो इसके प्रयास आपको युवावस्था से ही शुरू कर देने चाहिए।
युवावस्था में की गई एक्सरसाइज और संतुलिन जीवनशैली बुढ़ापे में होने वाली समस्याओं से आपको काफी हद तक राहत दिलवा सकती है। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अपने वजन को संतुलित रखकर, स्मोकिंग से दूर रहकर व व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर भविष्य में शुगर और उच्च रक्तचाप जैसी परेशानियों से खुद को काफी हद तक बचाया जा सकता है। यह अध्ययन बर्मिघम और बोस्टन हॉस्पिटल में संयुक्त रूप से किया जा रहा है। यहां ऐसी जीवनशैली पर शोध हो रहा है, जो बुढ़ापे को तकलीफ रहित बनाने में कारगर हो।
विशेषज्ञों ने इसके लिए 72 वर्ष से लेकर 92 वर्ष तक की उम्र वालों के बारे में जानकारी एकत्र की और उनकी जीवनशैली के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश की। अंतत: निष्कर्ष सामने आया कि युवावस्था से चला आ रहा नियमित व्यायाम ही उनके वर्तमान स्वास्थ्य का राज है।
सीधी सी बात है कि जो व्यक्ति युवावस्था के दौरान नियमित तौर पर व्यायाम करते और काफी हद तक संयमित जीवन जीते थे, वे वृद्धावस्था के दौरान अपने दूसरे साथियों की तुलना में अधिक चुस्त-फुर्तीले और स्वस्थ थे। दूसरी तरफ अस्वस्थ बूढ़े लोगों की परेशानियों का कारण उनका अधिक वजन और धूम्रपान के इतिहास को पाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुढ़ापे में होने वाली दिमागी कमजोरी का मूल कारण स्मोकिंग है। विशेषज्ञों ने कई ऐसे लोगों को भी खोजा है, जो संतुलित जीवनशैली के कारण 100 वर्षो तक जीवित रह चुके हैं। यदि छोटी मोटी तकलीफों को छोड़ दें तो उनका बुढ़ापा भी सुखमय ही रहा है।