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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
करीब 4000 करोड़ रुपए के प्राइडएशिया इंटेग्रेटिड हाउसिंग टाउनशिप प्रोजेक्ट के अलॉटीज ने अपने फ्लैट सरेंडर करना शुरू कर दिए हैं। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और पाश्र्वनाथ डवलपर्स के इस साझा प्रोजेक्ट में तमाम कोशिशों के बावजूद 216 फ्लैट्स और विला बिके थे जिनमें से 56 अलॉटीज ने अपने फ्लैट सरेंडर कर दिए।
आईटी पार्क में सुखना लेक के साथ डवलप की जा रही इस टाउनशिप में कुल 1314 फ्लैट्स और विला बनाए जाने हैं।
इनमें 500 वर्गगज के विला की कीमत 6 करोड़ रपए के करीब है जबकि सिंगल रूम फ्लैट 52 लाख के करीब। अभी तक जो फ्लैट सरेंडर हुए हैं उनमें 35 सिंगल बेडरूम फ्लैट हैं। किसी भी अलॉटी ने विला सरेंडर नहीं किया है। यानी लेक के किनारे बड़े बंगले में रहने की चाह अभी बरकरार है।
हाल ही में होम सेक्रेटरी कृष्णमोहन की अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में जब इस प्रोजेक्ट को रिव्यू किया गया तो बताया गया कि फेज दो में 1016 फ्लैट्स और विला के लिए एप्लीकेशन्स मांगी गई हैं जिसके रिस्पांस में 23 लोगों ने फ्लैट्स लेने में दिलचस्पी दिखाई है।
प्रशासन के लिए यह प्रोजेक्ट खास अहमियत रखता है क्योंकि इससे उसे 1500 करोड़ रुपए मिलेंगे। इस रकम का बड़ा हिस्सा चंडीगढ़ को स्लम फ्री सिटी बनाने पर खर्च किया जाना है, जिसके तहत 25 हजार सिंगल रूम फ्लैट बनाए जाने हैं।
ये फ्लैट उन लोगों को दिए जाने हैं जो इस वक्त शहर की विभिन्न अवैध बस्तियों में रह रहे हैं। लिहाजा प्राइडएशिया को मिल रहे फीके रिस्पांस से प्रशासन भी चिंतित है, लेकिन निराश नहीं। प्रशासन के एक सीनियर अफसर कहते हैं कि चंडीगढ़ का मुकाबला जीरकपुर और मोहाली में प्राइवेट बिल्डर्स के प्रोजेक्ट्स के साथ नहीं किया जा सकता।
देर सवेर इस प्रोजेक्ट को अच्छा रिस्पांस मिलेगा। अभी साइट पर काम शुरू नहीं हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में प्रोजेक्ट को एनवार्यन्मेंट क्लीयरेंस मिलने के बाद फ्लैट बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
इधर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सीईओ अमरनाथ कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट की लोकेशन नॉर्थ इंडिया में सबसे बेहतर है। ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता कि लोग इसे पसंद न करें। मार्केट में थोड़ा ठहराव जरूर है, लेकिन यह ठहराव ज्यादा देर तक नहीं रहने वाला। हमें प्रोजेक्ट की कामयाबी की पूरी उम्मीद है क्योंकि इसे डवलप करने वाली कंपनी का देशभर में मजबूत आधार है।
इधर रियल इस्टेट और इन्वेस्टमेंट कंसलटेंट आशुतोष कौशिक और मंगत राय कहते हैं कि फ्लैट्स की कीमत और ओवरहैड चार्जेज ज्यादा होने से कुछ लोग इस प्रोजेक्ट से हाथ पीछे खींच रहे हैं। इससे भी बड़ा कारण यह है कि अभी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने और मकानों का कब्जा लेने में दो से तीन साल का वक्त लगेगा और तब तक लोगों को इंटरेस्ट देना पड़ेगा।