सूरत.
योग के प्रति गैर हिंदुओं में हिचक अब टूटती जा रही है। इसका उदाहरण है देश का मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू-कश्मीर, जहां की एक बड़ी आबादी योग में खूब रुचि ले रही है। अंतर सिर्फ इतना है कि वहां के मुस्लिम सूर्य नमस्कार करते समय ‘ओम्’ की जगह ‘अल्लाह’ का उच्चरण करते हैं।
सूरत में शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय ‘विश्व योग प्रतियोगिता’ में अपने चार सदस्यीय योग प्रशिक्षुओं के दल के साथ शिरकत करने आए जम्मू-कश्मीर के योग साधक और प्रशिक्षक सज्जाद अहमद मीर की मानें तो चार साल में ही जम्मू-कश्मीर की करीब 75 फीसदी जनता योग करने लगी है। उनका कहना है कि योग एक ऐसी विधा है, जिसने राज्य में हिंसा के मार्ग पर चलने वालों को बंदूकें छोड़ने तक की सद्बुद्धि दी है।
मजहब का वास्ता : मीर ने बताया कि उनके प्रशिक्षक शब्बीर अहमद डाल को शुरू में कई मजहबी लोगों ने योग से दूरी बनाने की सलाह दी। उन लोगों का मानना था कि यह हिंदू धर्म का खेल है, लेकिन शब्बीरभाई ने हार नहीं मानी और सड़कों के किनारे अपने दस भरोसेमंद साथियों के साथ सूर्य नमस्कार और अन्य यौगिक क्रियाओं का प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि इसमें उन्होंने ‘ओम् नाद’ के स्थान पर ‘अल्लाह नाद’ का बदलाव किया। इसके बाद घाटी के लोगों ने इसे तेजी से अपनाया।
मीर का दावा है कश्मीर के अधिकांश मौलवी और राजनेता भी योग करते हैं।
ब्रिटेन में योग कक्षाओं पर लगा था प्रतिबंध
पिछले साल ब्रिटेन के टाउनटन कस्बे में दो चर्चे में संचालित योग कक्षाओं को वहां के पादरियों ने केवल इस आधार पर प्रतिबंधित कर दिया था कि योग ईसाइयत के खिलाफ है। इस पर उस समय काफी हंगामा भी मचा था। योग गुरु बाबा रामदेव ने इसका विरोध करते हुए साफ कहा था कि योग शिक्षण को किसी धर्म के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।