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खो गए पानी के रास्ते

अजमेर.drainage जल आवक स्रोतों की बहाली के आदेश शहर में बेमानी होकर रह गए हैं। आनासागर झील में बरसाती पानी आवक तथा शहर से पानी के निकासी के अधिकांश स्रोत अपने अस्तित्व को तरस रहे हैं। उच्च न्यायालय ने जल आवक व निकासी के प्राकृतिक स्रोतों की स्थिति बहाल करने के लिए प्रशासन को आदेश दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट नगर परिषद शहर में एक के बाद एक जल निकासी स्रोतों की चौड़ाई को कम किये जा रही है।

नाली बने नाले

झील में पानी आवक के कुल तेरह रास्तों में से अब केवल काजी का नाला, शांतिनगर, आंतेड़, चौरसियावास, बाडी नदी, नागफणी के रास्ते खुले हैं। अतिक्रमण व मिट्टी निकासी नहीं होने के कारण ये रास्ते नालों से नालियों में तब्दील हो चुके हैं। जबकि रातीडांग, रीजनल कॉलेज परिसर के दो, कोटड़ा, मित्तल अस्पताल, फॉय सागर रोड तथा पत्थर की फैक्ट्री क्षेत्र से आने वाले सभी रास्ते विगत तीन-चार सालों में बंद हो चुके हैं।

अदालत के आदेश

अब्दुल रहमान बनाम सरकार मामले में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जल आवक व निकासी के प्राकृतिक स्रोतों की सन् 1947 वाली स्थिति बहाल करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत झीलों से तथा इनमें बरसाती पानी के आवक व निकासी के रास्तों से अतिक्रमण चिह्नित कर उन्हें हटाने तथा उनके कैंचमेंट क्षेत्र में अवरोधों को हटाने की कार्रवाई शामिल है।

आना सागर झील में बरसाती पानी आवक के रास्तों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नगर परिषद स्तर पर अपेक्षित है। परिषद को कहा गया है कि इसमें किसी प्रकार की तकनीकी सहायता की जरूरत हो, तो विभाग देने को तैयार है।
-रवि सारस्वत, एइएन, सिंचाई उपखंड शहर

झील में पानी आने के रास्तों में अतिक्रमणों को चिह्नित करने के संबंध में सर्वे कराया गया है। जिला स्तर पर एडीएम द्वितीय की अध्यक्षता में गठित कमेटी को सर्वे रिपोर्ट दी गई है। आना सागर व पाल बीसला के भराव क्षेत्र में आने वाले खसरों की रिपोर्ट तहसील से मांगी गई है।>- बी.एल. सोनी, एक्सइएन





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