कोटा. बदलते समय के साथ बदलना जरूरी है, लेकिन विकृत तरीके का यह बदलाव ऐसी आंधी नहीं बन जाए जो सब कुछ उड़ाकर ले जाए। वैश्वीकरण एक ऐसा खतरा बनकर उभर रहा है, जो देश में आतंकवाद और सांप्रदायिकता को भी हवा दे रहा है। यह बात प्रसिद्ध रचनाकार चंद्रकांता ने शनिवार को ‘सामयिक साहित्य और चुनौतियां’ विषय पर दिए अपने व्याख्यान में कही।
पुलिस लाइन स्थित बाल विद्यालय में हितकारी समिति के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर रखे गए कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री भुवनेश चतुर्वेदी, राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री हरिकुमार औदिच्य और पूर्व महापौर ईश्वरलाल साहू समेत कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे। मूलत: कश्मीर निवासी और दिल्ली में रह रही विख्यात कथाकार चंद्रकांता ने रूस के महान लेखक मक्सिम गोर्की की उस टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि हम कौन सा भविष्य विरासत में दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण का हमला हमारी साझी संस्कृति और परंपराओं पर हुआ है। इसके खतरनाक परिणाम सामने आ रहे हैं। यांत्रिकता के इस दौर में नई पीढ़ी कहीं पैसा कमाने वाला यंत्र बनकर न रह जाए। वैश्वीकरण और तकनीकी विश्व बाजार के इस दौर में हमने काफी कुछ पाया है, लेकिन आयातित संस्कृति की अंधी दौड़ हावी होती जा रही है, उससे हमारे बच्चे संवदेनशून्यता के हवाले हो रहे हैं। रचनाकार का दायित्व है कि वह शून्य हो गई संवेदना और चेतना को जाग्रत करने के लिए लिखे।
कश्मीर के साथ हर पार्टी ने धोखा किया
चंद्रकांता ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद पनपने का कारण सामाजिक और आर्थिक होने के साथ ही राजनीतिक है। सभी राजनीतिक दलों ने कश्मीरी पंडितों के साथ धोखा किया है। वे आज अपने ही घर में शरणार्थी बन गए। मुसलमान भी इससे अछूते नहीं हैं। आतंकवाद वह दुधारी तलवार है, जो किसी को भी नहीं बख्शती। कार्यक्रम में बाल हितकारी समिति के सचिव भुवनेश चतुर्वेदी और साहित्यकार डा. प्रेमचंद विजयवर्गीय ने भी विचार व्यक्त किए।