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कागज फाड़े और धरना दिया

कोटा.fight अंबेडकर भवन में शनिवार को नगर निगम की बैठक में सफाई, भ्रष्टाचार, और अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा हुआ। सत्ता-विपक्षी पार्षदों ने निगम को घेरने का प्रयास किया। अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई गई। उपमहापौर रविंद्रसिंह निर्भय ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जगह-जगह कब्जे हो रहे हैं। अधिकारियों से कहना चाहते हैं गंभीरता से काम करें।

यदि हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो बोर्ड को भंग कर दो। कांग्रेस के पार्षद मोडूलाल वर्मा ने बोलने से रोकने के विरोध में दो बार सदन में धरना दिया। वर्मा सदन को बताना चाह रहे थे कि उनके वार्ड की सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है। इस बीच भाजपा पार्षदों ने बीच में बोलना चाह तो गुस्से में वर्मा ने महापौर के सामने धरना दे दिया।

जैसे तैसे उन्हें मनाया गया और वे जैसे ही बोलने लगे तो फिर हालात पैदा हो गए। इस पर गुस्साए वर्मा ने फिर धरना दिया। बाद राकेश सोरल ने उन्हें समझाकर फिर से माइक पर खड़ा किया। निर्दलीय पार्षद उमर सीआईडी ने सुनवाई नहीं होने पर प्रश्नों कागजात फाड़ कर अपना रोष जताया। बाड़ राहत कार्र्यो के तहत 2004 में बनाई गई दीवार का भुगतान 2008 में किए जाने पर कई पार्षदों ने भ्रष्टाचार की शिकायत की और निगम पर मामले को दबाने का आरोप लगाया।

सत्ता पक्ष के पार्षदों ने महापौर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। बृजेश शर्मा नीटू ने कहा कि बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक से कई अधिकारी नदारद हैं। इनके अलावा सफाई, उद्घाटन से पूर्व निगम के एक भवन को बारातों के लिए किराए पर देने, बैराज पर अवैध रूप से दुकान का बेचान, 80 लाख रुपए की मशीनों खरीद में गड़बड़ी, भवन निर्माण में भ्रष्टाचार, खेलकूद सामग्री के संबंध में कई मुद्दों पर पार्षदों ने महापौर व अधिकारियों को घेरा।





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