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आंकड़ों का खेल : 23 वारदात, एफआईआर 1

कोटा.cartoon पुलिसकर्मी आला अफसरों व गृह विभाग की आंखों में किस तरह धूल झोंकते हैं, इसका नमूना है कैथून थाना, जहां चोरी के आंकड़े कम दिखाने के लिए अलग-अलग दिन और भिन्न-भिन्न स्थानों पर हुई वारदातों को एक ही प्राथमिकी में दर्जकर लिया।

थाना क्षेत्र के खेड़ारसूलपुरा, दसलाना, खेडलीपांडे, कैथून, खेड़ामाल, मंडानियामाल, अरनियां, दसलानामाल, रामखेड़ली, भगवानपुरा व दीपपुरा गांवों में 11 नवंबर 07 से 3 जनवरी 08 तक बिजली उपकरण चोरी की 23 वारदातें हुईं। विद्युत वितरण निगम के सहायक अभियंता भगवान प्रसाद ने सभी वारदातों की लिखित सूचना कैथून थाने को दी थी।

थाने ने उस पत्र को आधार बनाकर सभी वारदातों को 5 जनवरी 2008 को एक ही एफआईआर नंबर 05/08 में दर्जकर जांच थाने के एएसआई अशोकसिंह को सौंप दी। कानून विशेषज्ञों के अनुसार अपराध दंड संहिता (सीआरपीसी) में प्रावधान है कि जितनी भी वारदात हों, उन सबकी अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। चाहे उनकी सूचना देने वाला व्यक्ति एक ही क्यों न हो।

कारण, कानून यह मानता है कि सूचना देने अथवा रिपोर्ट दर्ज कराने वाला व्यक्ति कानूनी दावपेंचों से अनजान होता है। यदि उसने एक ही लिखित सूचना दी है तो पुलिस का फर्ज बनता है कि वह सभी की रिपोर्ट अलग-अलग दर्ज करे।

क्या असर होगा

अलग-अलग समय व अलग-अलग स्थानों पर हुई वारदातों को एक ही प्राथमिकी में शामिल करने से विभिन्न घटनाओं का अनुसंधान सही तरीके से नहीं हो सकेगा। यदि आरोपी पकड़ में आ भी गए तो पुलिस को पूछताछ व माल बरामद करने के लिए अभियुक्तों का रिमांड लेने में दिक्कत आएगी। आरोपियों का वकील पुलिस की इस कमजोरी का लाभ उठाकर अपने मुवक्किल को बचा भी सकता है। ऐसे में अभियुक्तों को सजा दिलवाना टेढ़ी खीर साबित होगा। यही नहीं, अदालत केस की तैयारी के संबंध में पुलिस की कार्यप्रणाली पर विपरीत टिप्पणी भी कर सकती है।

इनका कहना है

सीआरपीसी में स्पष्ट प्रावधान है कि एक वारदात की एक रिपोर्ट दर्ज की जाए व उसका अलग ही नक्शा मुआयना बनाया जाए। यदि एक सूचना को आधार मानकर 23 वारदातों को एक एफआईआर में दर्ज किया गया है तो यह लीपापोती की कार्रवाई है।
—अख्तर खान अकेला, अपराध मामलों के अधिवक्ता

‘ऐसा करना सीआरपीसी का उल्लंघन है। पुलिस इस मामले में वारदातों की ठीक प्रकार से जांच नहीं कर पाएगी। तकनीकी दृष्टि से की गई लापरवाही का लाभ मुल्जिमों को मिलेगा।
-मनीष शर्मा, अधिवक्ता

मामले की जांच कराएंगे

एसपी (ग्रामीण) डी.एस.चूड़ावत ने कहा, मुझे पदभार ग्रहण किए कुछ ही दिन हुए हैं, इसलिए इस बारे में जानकारी नहीं है। यदि कई वारदातों की एक ही एफआईआर दर्ज की गई है तो जांच करवाएंगे।





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