न्यूयॉर्क. आपको यह जानकर थोड़ी हैरानी होगी कि स्कूली जीवन से पहले के उम्र वर्ग के ऐसे बच्चों में खुद को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति अधिक होती है जो जरूरत से कम सोते हैं। एक नए अध्ययन से इसकी पुष्टि होती है कि कम सोने वाले बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ रोचैस्टर के स्कूल ऑफ नर्सिग के शोधकर्ताओं के किए शोध के मुताबिक, जो बच्चे नियमित रूप से कम सोते हैं उनमें उन बच्चों की तुलना में खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति दोगुणी होती है जो नींद के मामले में संतुलन बनाए रखते हैं।
यूएस नैशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक तीन से छह वर्ष के बच्चों को नियमित रूप से रोजाना 11 घंटे या इससे अधिक सोना चाहिए। जरूरत से कम सोना बच्चों के लिए नुकसानदेह हैं। करीब 300 महिलाओं से उनके बच्चों की नींद के बारे में पूछताछ के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है।