भोपाल. बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित दो दिनी हड़ताल शुरू होने से पहले ही सोमवार तड़के खत्म हो गई। महीने भर पहले से प्रचारित बैंक कर्मियों की 25 और 26 फरवरी की हड़ताल के इस तरह अचानक समाप्त होने के कारण राजधानी में आनन-फानन में बैंकों की शाखाएं तो खुलीं, लेकिन उनमें ग्राहकों की संख्या नगण्य रही।
बैंक यूनियंस के प्रतिनिधियों के मुताबिक रविवार सोमवार की दरम्यानी रात में एक बजे तक दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल तय थी। इस बीच तड़के यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के प्रतिनिधियों को भारतीय बैंक संघ (आईबीए) का बुलावा आया कि वे बैंक उनकी मांगों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। इसके बाद यूएफबीयू ने सुबह पांच बजे अपनी दो दिवसीय हड़ताल और मार्च के अंतिम सप्ताह में होने वाली हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी।
तीन मार्च से बैंक यूनियंस की मांगों, जिसमें प्रमुख रूप से पेंशन का एक और विकल्प दिए जाने के मुद्दे पर बात करने पर सहमति हो गई है। इधर, हड़ताल वापसी की घोषणा के बाद सोमवार सुबह बैंक खुल गए और उनमें अधिकारी-कर्मचारी भी बमुश्किल पहुंचे। हालांकि ग्राहकों को बैंक खुलने का पता न होने से वे बैंकों में लेनदेन करने नहीं पहुंचे।
व्यापारी और आमजनता नाराज
बैंक यूनियनों और सरकार के बीच सोमवार सुबह पकी खिचड़ी से आम जनता और व्यापारी खासे नाराज हुए। उनका दो टूक कहना था कि सरकार या बैंकों को जनता की जमा पूंजी से हड़ताल करने और वापस लेने की बात कहकर वापस लेना सरासर नाइंसाफी है। पीएचडी चैंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष राजेंद्र कोठारी का कहना था कि जब सुप्रीम कोर्ट हड़तालों पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात कह रहा है। ऐसे में बैंक यूनियनों द्वारा बार-बार हड़ताल करना आम जनता के साथ व्यापारियों को मुसीबत का सबब बनता है। साथ ही जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई करना संभव ही नहीं है।
थोक दाल चावल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष मोतीराम वाधवानी ने बताया कि व्यापारी नगद ऋण और साख व्यवस्था के अनुसार व्यवसाय करता है, ऐसे में वह अपनी जमा पूंजी से रोज निकासी करके व्यवसाय में लगाता है। बैंक कर्मियों की पहले से घोषित हड़ताल के कारण व्यापारियों ने दो दिन पहले ही बैंकों से रुपयों की निकासी कर ली, इससे उन्हें खासा नुकसान उठाना पड़ा।
चैंबर आफ कामर्स भोपाल के अध्यक्ष संतोष अग्रवाल का कहना था कि चूंकि व्यवसाय सीधे बैकिंग लेनदेन से जुड़ा है। ऐसे में लगातार दूसरे महीने में हड़ताल होना दुर्भाग्य है। वह भी घोषित हड़ताल सुबह पांच बजे खत्म करने की बात कहना कहीं तक उचित नहीं है। गल्ला व्यापारी संघ के सचिव राधेश्याम माहेश्वरी का कहना था कि बैंक हड़ताल होने पर गल्ला व्यापारी पहले से ही रणनीति तय कर लेते हैं कि उन्हें कितनी खरीदी करना है।
पहली बार बनी ऐसी स्थिति
अब तक बैंक कर्मचारियों की हड़ताल होने या न होने की जानकारी आम जनता तक एक दो दिन पहले ही पहुंच जाती थी। पहली बार ऐसी स्थिति बनी कि हड़ताल शुरू होने के पांच घंटे पहले वापस ली गई है, जिसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा।