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25 करोड़ का मिलावटी कारोबार

भोपाल. राजधानी सहित पूरे प्रदेश में नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक यहां सिर्फ दूध, घी, पनीर और मावे से जुड़ा नकली व मिलावट का कारोबार हर महीने 25 करोड़ रुपए से अधिक का है। उस पर खाद्य निरीक्षकों की कमी ने मिलावटखोरों को बेखौफ कर दिया है। स्थापित व्यापारी भी स्वीकारते हैं कि बाजार में मिलावटखोर कब्जा जमाते जा रहे हैं।

जनवरी में ही खजूरी पुलिस ने छापा मारकर नकली मावा बनाने के बड़े कारोबारियों का पर्दाफाश किया था। इसमें मिलावटखोर भोपाल में नकली मावा तैयार कर दिल्ली और मेरठ भेजते थे। इससे पहले के खुलासे भी स्पष्ट करते हैं कि भोपाल सहित प्रदेश के मिलावटखोरों के तार देश के कई बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान सहित कई राज्यों में यहां से नकली व मिलावटी खाद्य सामग्री लाई और ले जाई जाती है।

मुनाफा और सस्ते का चक्कर

मिलावटखोर जहां मोटे मुनाफे के चक्कर में गड़बड़ करते हैं, वहीं उपभोक्ताओं को सस्ते का चक्कर ऐसे उत्पादों की ओर खींचता है। नकली उत्पाद शुद्ध की तुलना में आधे से भी कम लागत में तैयार हो जाता है। इस कारण तगड़ा मुनाफा होता है। नकली व मिलावटी उत्पाद असली जैसी पैकिंग में बेचा जाता है, जिसके कारण उपभोक्ता धोखा खा जाते हैं।

भोपाल में 71 नमूने गड़बड़ पाए गए

राजधानी में इस साल नकली व मिलावटखोरी के मामले में 206 नमूने लिए गए। इनमें 71 नमूने गड़बड़ पाए गए। बाकी की रिपोर्ट नहीं आई है। खाद्य एवं औषधि विभाग ने जनवरी-फरवरी में भी भोपाल में बड़ी संख्या में नमूने लिए हैं। इनकी जांच चल रही है। फरवरी में अभी तक 12 मामले पंजीबद्ध किए गए हैं।

अमले की कमी

नकली व मिलावटी खाद्य सामग्री की धरपकड़ में सबसे बड़ा रोड़ा अमले की कमी है। वर्तमान में प्रदेश में मात्र 18 खाद्य निरीक्षक हैं। इनमें से सात को विशेष अभियान के तहत ग्वालियर संभाग सौंप रखा है। 255 पदों पर निरीक्षकों की भर्ती हो चुकी है और ट्रेनिंग चल रही हैं।

उपभोक्ता बेबस

सामान्यत: उपभोक्ता पहचान ही नहीं कर पाते कि उत्पाद मिलावटी है या नहीं। शक्तिनगर निवासी संजना शर्मा का कहना है कि सुबह-शाम दूध-घी जैसी चीजें लगती ही हैं। अब बाजार में जो हो वही लेना पड़ता है। सरकार को हर क्षेत्र की दुकानों की जांच करना चाहिए।

अशोका गार्डन निवासी विजय पांचाल का कहना है कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों में सरकार को मिलावट की जांच करने वाली सार्वजनिक व्यवस्था करना चाहिए, ताकि जिसे शंका हो वह तुरंत जांच करा सके।

बच निकलते हैं आरोपी

नकली व मिलावट के मामलों में ज्यादातर आरोपी बच निकलते हैं। सूत्रों के मुताबिक 2006 में जहां तीन हजार से अधिक नमूनों में 308 गड़बड़ पाए गए, वहीं जुर्माना या सजा सिर्फ 79 लोगों को हो सकी। एगमार्क या ब्रांडनेम की स्पेलिंग में चेंज या अन्य छोटी-छोटी बारीकियों का कानूनी फायदा उठाकर ये आरोपी बच निकलते हैं।

बोले अधिकारी

अभी हमें भिंड और मुरैना से अधिक शिकायतें मिली हैं, इसलिए वहां विशेष अभियान चला रहे हैं। भोपाल के मामले में बहुत ही कम शिकायतें हैं। फिर भी यहां नियमित चेकिंग चलती रहती है।

- आलोक श्रीवास्तव, संयुक्त नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि विभाग

एक महीने में औसत दस सेम्पल हर जिले में लिए जाने चाहिए, फिर भी हम हर महीने 20 से अधिक सेम्पल लेते हैं। जनवरी-फरवरी में 40 से अधिक सेम्पल लिए जा चुके हैं। इनकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है।

- देवेंद्र कुमार वर्मा खाद्य निरीक्षक, भोपाल





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