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खाद्य तेल की कीमतों में ‘आग’

भोपाल. खाद्य वस्तुओं के आनलाइन वायदा कारोबार के दुष्परिणाम दिखाई देने लगे हैं। सोमवार को खाने के तेलों में तेजी के सारे रिकार्ड टूट गए। सोमवार को राजधानी के थोक बाजारों में तेल के सभी ब्रांड में 80 से 300 रुपए टिन तक बढ़ाकर बताए गए। तेजी की मुख्य वजह वायदा बाजार में चल रहा सट्टा है।

सूत्रों के मुताबिक कमोडिटी वायदा बाजार के खिलाड़ियों ने सोयाबीन में चीन की भारी मांग की खबर के सहारे आज तेलों की कीमतों में आग लगा दी। मात्र एक दिन में सोयाबीन तेल का भाव 61 से बढ़कर 65 रुपए किलो पर पहुंच गया है। मूंगफली तेल 80 रुपए किलो के शिखर पर है। व्यापारियों के अनुसार आज सबसे ज्यादा तेजी सोयाबीन और सनफ्लावर तेलों में रिकार्ड की गई। वायदा बाजार में इनके मार्च वायदा सौदे बहुत ऊपर रिकार्ड हुए।

चीन का असर भारत में: सूत्रों के अनुसार चीन की मांग बढने और देश में सरसों की पैदावार कम होने के समाचारों के बीच आज तिलहन और खाद्य तेलों ने वायदा बाजार में तेजी आसमान छूने लगी और सíकट ब्रेकर का इस्तेमाल करना पड़ा। जुलाई के लिए सरसों का भाव तीन प्रतिशत की सीमा से उपर निकल गया और इसके भाव ६१२ रुपए प्रति २क् किलो बोले गए। सोयाबीन प्रति क्विंटल भाव २३२१ रुपए बोला गया। अप्रैल के लिए सोया तेल ६६६.३ रुपए प्रति १क् किलो के नए शिखर पर पहुंच गया।

उधर मलेशिया में मई के लिए पाम आयल ३९१४ ¨रगिट अर्थात १२१७ डालर प्रति टन के रिकार्ड स्तर पर बोला गया। बाजार विश्लेषक इस अभूतपूर्व तेजी के लिए चीन में पैदावार कम होने को मुख्य कारण मान रहे हैं। चीन में दो लाख टन कम पैदावार का अनुमान लगाया गया है।

वायदा बाजारों में पिछले सप्ताह भी खासी तेजी का रुख रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भी इसका एक कारण मानी जा रही है, क्योंकि कच्चे तेल के महंगा होने से जैव ईंधन के लिए तिलहनों की अधिक मांग निकल सकती है।





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