अजमेर. नि:शक्तजन जन सुनवाई में विकलांगों को चिकित्सा प्रमाण-पत्र जारी करने में कोताही करने वाले डॉक्टर को नि:शक्तजन आयुक्त ने सोमवार को कड़ी फटकार लगायी। उन्होंने अफसरों को डॉक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सूचना केन्द्र में सोमवार को जन सुनवाई रखी गई। विभिन्न विभाग शिकायतों व प्रार्थना-पत्रों के पंजीयन की कार्रवाई कर रहे थे।
निरीक्षण में आयुक्त खिल्लीमल जैन को चिकित्सा विभाग के काउंटर पर भीड़ दिखी। उन्होंने लोगों से पूछताछ की। काउंटर पर खड़े देहली गेट निवासी शंकर लाल, अजयनगर के ईश्वर दास तथा गेगल की बानो बेगम ने बताया कि वे सुबह से खड़े हैं, लेकिन डॉक्टर ने चिकित्सा प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया।
यहां केवल लॉलीपॉप
शंकरलाल ने बताया कि चिकित्सक उन्हें कह रहे हैं ‘यहां तो केवल लॉलीपॉप दी जा रही है। नेहरू अस्पताल में जा कर प्रमाण-पत्र बनवाएं। यहां कुछ होने वाला नहीं है’।
अनुशासनात्मक कार्रवाई का नाम तो सुना होगा
विकलांगों की समस्या पर जैन ने डॉ. अशोक शर्मा से जानकारी मांगी। शर्मा जवाब नहीं दे सके। जैन ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा ‘सरकार की नीतियों को विफल व बदनाम करने का काम आप जैसे ही कर रहे हैं। अनुशासनात्मक कार्रवाई का नाम तो सुना होगा, अब तक पता नहीं होगा यह होता क्या है, अब पता चल जाएगा।’
उन्होंने डॉक्टर से सवाल किया कि आपने डिग्री लेते समय क्या शपथ ली थी, कम से कम उसका तो खयाल रखिए। जैन ने उसी समय वहां मौजूद एससी-एसटी वित्त विकास निगम की प्रभारी श्रीमती कमला को डॉ. शर्मा के खिलाफ अफसरों को पत्र लिख कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
अफसरों को बुलाया
नि:शक्तजन की शिकायतें सुन कर जैन ने पूछा कि चिकित्सा विभाग के अफसर कहां हैं? इस पर वहां मौजूद अन्य चिकित्सकों ने सीएमएचओ डॉ. बी.एल. फानन तथा एडिशनल सीएमएचओ डॉ. लक्ष्मण हरचंदानी को फोन करके सूचना केन्द्र बुलाया। सीएमएचओ ने वहां पहुंच कर विकलांगों की जांच व प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए नेहरू अस्पताल से अतिरिक्त स्टाफ बुलाया। तब कहीं जाकर कार्रवाई शुरू हो सकी।
बैरंग लौटाया
जन सुनवाई खत्म होने के बाद डॉ. अशोक शर्मा नि:शक्तजन आयुक्त जैन के पास पहुंच गए। शर्मा ने सुबह की घटना पर माफी मांगने की कोशिश की। जैन ने उनकी एक नहीं सुनी, उलटा डांट कर बैरंग लौटा दिया।