नई दिल्ली.
पहली बार भारत की यात्रा पर आए बांग्लादेशी सेना प्रमुख ने सोमवार से अपनी सप्ताहभर की यात्रा शुरू की और थलसेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने उन्हें छह घोड़े भेंटकर सदभावना तोहफा प्रदान किया।
जनरल मोईन यू अहमद भारत की यात्रा करने वाले पहले बांग्लादेशी सेना प्रमुख हैं और पड़ोसी देश के बदले हुए राजनीतिक हालात में इसे काफी महत्व दिया जा रहा है। उनका विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा राज्य मंत्री पल्लम राजू और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन से भी मिलने का कार्यक्रम है।
वह भारतीय सैन्य अकादमी देखने जाएंगे और कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ भी मुलाकात करेंगे। जनरल अहमद का सोमवार सुबह साउथ ब्लाक के प्रांगण में विधिवत स्वागत किया गया। इसके बाद जनरल कपूर ने उन्हें दो घोड़े और चार घोड़ियां भेंट स्वरूप प्रदान की ताकि बांग्लादेश को अश्वशक्ति से लैस किया जा सके।
मंगलवार सुबह तीन ट्रकों से दोनों घोड़े और चार घोडिय़ां अपने नए घर की ओर प्रस्थान करेंगे और छह दिन की थकाऊ यात्रा के बाद भारत की अंतिम सीमावर्ती चौकी हरिदासपुर पहुंचकर ये अपने वतन को अंतिम विदाई देंगे। बनीपोल चौकी पर इन घोडों का पूरे सैनिक सम्मान के साथ इस्तकबाल किया जाएगा और उसके बाद उनका मकसद होगा इस नए वतन को अश्वशक्ति से लैस करना।
करोड़ों के घोड़े भेंट किए
भेंट किए हर घोड़े की कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक है जबकि करीब चालीस चालीस लाख रुपए की घोड़ियां हैं। इस मौके पर सेना की रिमाउंट एवं वेटेनेरी कोर के महानिदेशक लेफ्टीनेंट जनरल एन मोहंती ने बताया कि बांग्लादेश की सेना का दिया गया वेलिएंट नाम का कद्दावर घोड़ा वोलकेनो का बेटा है जिसकी रगों में अपनी मां के जरिय अरब लहू दौडता है, प्रसिद्ध घोड़े सुमरक की बेटी थी। यह वही सुमरक है जिसे रूसी सरकार ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को 1960 में भेंट किया था। वेलिएंट का दोस्त आरजू भारतीय अश्व अजरुन का बेटा है और जिसकी दूसरी संतानें घुड़सवारी की अनेक प्रतियोगिताओं में नाम कमा रही हैं।