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टेंशन किया तो हो सकती है डायबिटीज

ग्वालियर. गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के योगा विभाग के डा. राकेश कुमार का कहना है कि टाइम बाउंड टास्क से टेंशन होता है और टेंशन (तनाव) से डायबटीज हो सकती है। जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित सेमीनार में भाग लेने आए डा. राकेश कुमार दैनिक भास्कर से बात कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि टाइम बाउंड टास्क से टेंशन होता है और टेंशन के कारण शरीर में ग्लूकोज की मांग बढ़ जाती है, इस बढ़ी हुई मांग को ग्रंथिया अधिक ग्लूकोज बनाकर पूरा करती हैं। लगातार यही स्थिति बनी रहने के कारण डाइबिटीज रोग हो जाता है।

उन्होंने कहा कि फास्ट फूड, अधिक काबरेहाइड्रेट वाली डाइट व गड़बड़ दिनचर्या के कारण डाइबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और यही स्थिति रही तो वर्ष 2025 में देश में सबसे अधिक डायबिटीज के रोगी होंगे।

उन्होंने कहा कि खान-पान की आदतों में सुधार कर नियमित योग करने से इससे बचा जा सकता है। मास्को, सियोल, तेहरान सहित कई देशी-विदेशी शहरों में योग पर व्याख्यान दे चुके डा.राकेश कुमार ने बताया कि कम्प्यूटर पर काम करने वाले की गर्दन व पीठ में दर्द तथा स्पोंडिलाइटिस से योग द्वारा बचाव परउनके मार्गदर्शन में रिसर्च चल रहा है।

इसके अलावा महाभारत में अजरुन का टेंशन खत्म करने के लिए श्रीकृष्ण भगवान द्वारा दिए गए उपदेशों पर रिसर्च चल रहा है। उन्होंने कहा कि योग को स्कूल शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी शारीरिक व बौद्धिक विकास के साथ नैतिक रूप से भी सुदृढ़ हो सके।

बीड़ी या सिगरेट का कश लगाने वाले न करें योग
सेंट्रल काउंसिल फार रिसर्च इन योगा एण्ड नैचुरोपैथी (सीसीआरवायएन) नई दिल्ली के निदेशक डा.टीबी चिदानंद मूर्ति का कहना है कि बीड़ी या सिगरेट पीने वालों को योग से लाभ होने के बजाय पर नुकसान हो सकता है।

जीवाजी विश्वविद्यालय में एक सेमीनार में भाग लेने ग्वालियर आए डा.मूर्ति सोमवार को दैनिक भास्कर से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीड़ी या सिगरेट पीने वालों के फेफड़ों में कार्बन मोनो आक्साइड व अन्य टाक्सीन पहुंचते हैं। यदि ऐसे लोग योग करते हैं तो उनके फेफड़ों में कार्बन मोने आक्साइड अधिक मात्रा में पहुंचती है और फेफड़ों को नुकसान होता है।

उन्होंने कहा कि योग कोई चमत्कार नहीं है और यदि गंदे मन या तन से योग किया जाए तो उसका कोई फायदा नहीं होता है। डा.मूर्ति ने बताया कि सीसीआरवायएन का रिसर्च का बजट पहले एक करोड़ रुपए था लेकिन अब पांच करोड़ रुपए हो चुका है और इस पंच वर्षीय योजना में यह 10 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि हृदय रोग, कैंसर सहित 12 बीमारियों पर रिसर्च के लिए अनुदान दिया है और यह रिसर्च चल रही है। इसके अलावा योग व प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए भी केन्द्रीय आयुष विभाग सभी मंत्रालय के सहयोग से काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इलाज के लिए डाक्टरों के पास पहुंचने वाले गंभीर हृदय रोगियों में से 90 फीसदी सर्जरी करवा रहे हैं और दस फीसदी योग से ठीक हो रहे हैं लेकिन योग से 90 फीसदी मरीज ठीक हो सकते हैं और 10 फीसदी मरीजों को ही सर्जरी की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए योग के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जा रहा है।





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