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कैसे हैं आपके बॉस

ग्वालियर. मुंबई की एक सर्वे कंपनी गॉलअप ऑर्गनाइजेशन द्वारा ऐसे ही विषय को लेकर 80 हजार मैनेजर्स के बीच कराए सर्वे में भी यही कारण सबसे प्रमुख था। प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे कर्मचारियों की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि वह कम्पनी को कितना भी अच्छा आउटपुट देने की कोशिश करें लेकिन उनके बॉस को कभी संतुष्टि नहीं होती। मजबूरी में कर्मचारी को नौकरी छोड़नी पड़ती है।

बॉस का था रफ बिहेवियर
बॉस के रफ बिहेवियर के कारण नौकरी से रिजाइन देने वाले रोहित कुमार बताते हैं कि बॉस का व्यवहार इतना रूड़ था कि तंग आकर उन्होंने छह महीने के अंदर जॉब छोड़ दिया। टारगेट पूरा करने के बावजूद बॉस सभी कर्मचारियों के सामने चिल्लाते थे। एक दिन गुस्से में आकर मैंने जॉब छोड़ने का निर्णय लिया और एक हफ्ते के बाद रिजाइन दे दिया।

सारा दिन रहते थे गुस्से में
बॉस के अनावश्यक गुस्से के कारण निखिल ने जॉब से रिजाइन दे दिया। निखिल का कहना है कि कम्पनी में एंटर होते ही बॉस सभी एम्पलॉयज पर बेवजह गुस्सा करने लगते थे। एक दिन सारा काम खत्म करके जब मैं घर जाने के लिए ऑफिस से निकल ही रहा था कि बॉस का फोन आ गया और ढेर सारे काम बताते हुए गुस्सा करने लगे। सुबह सबसे पहले आते ही मैंने बॉस की टेबल पर रिजाइन लेटर रख दिया।

बॉस का कहना
सिखाने के लिए करते हैं : एचडीएफसी बैंक के ब्रांच मैंनेजर शैलेश निओल का मानना है कि बॉस किसी भी एम्पलॉय को पर्सनल लेवल पर नहीं टोकता वह तो केवल कम्पनी के फायदे के लिए एम्पलॉइज के प्रति कड़ा रुख अपनाता है। कई बार बॉस टीम को एक साथ बांधकर रखने के लिए भी ऐसा रवैया अपना लेते हैं।

बन जाएं गुड बॉस :
एम्पलॉयज की फीलिंग्स का ध्यान रखें।
व्यवहार में नम्रता लाएं
फ्रेंडली एटमोसफियर के साथ काम करें
स्ट्रेस फ्री रहने के लिए हफ्ते में एक बार कुछ डिफरेंट एक्टिविटी में भाग लें
पॉलिसी मेकिंग में अपने एम्पलॉइज का ध्यान रखें।





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