लंदन. वैज्ञानिकों ने वायु-विलय पात्र (एयरोसोल) तकनीक द्वारा चेचक के टीके को बंदरों में सुरक्षित ढंग से पहुंचाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। जल्द ही इस तकनीक का प्रयोग मनुष्यों में टीके को पहुंचाने के लिए किया जाएगा। अगर इसमें शोधकर्ताओं ने सफलता हासिल कर ली तो टीका लगाने के लिए सुई का प्रयोग शायद भविष्य में खत्म हो जाएगा।
एयरोसोल ऐसा उपकरण है जो कि तरल पदार्थों को दबाव में रखता है और दबाव हटाने पर हटाने पर बौछार के रूप में इन्हें निकालता है। (एक परफ्यूम की शीशी की तरह)
बंदरों पर किए प्रयोग में वैज्ञानिकों को ज्ञात हुआ कि एयरोसोल के माध्यम से सुरक्षित ढंग से वैक्सीन को शरीर में पहुंचाया जा सकता है। वेबसाइट ‘साइडेव डॉट नेट’ पर जारी रिपोर्ट के अनुसार यह वैक्सीन विकासशील देशों के लिए ज्यादा लाभदायक साबित होगा, जहां लोगों को सुरक्षित ढंग से टीका लगाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता।
‘स्विस इंस्टीट्यूट फॉर एक्सपेरिमेंटल कैंसर रिसर्च’ के समन्वयक और इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता (साईडेव डॉट नेट) कहते हैं कि बंदरों के बाद इस तकनीक के माध्यम से मनुष्यों में टीका पहुंचाया जाएगा।