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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. सुखना लेक के पानी में तैरने वाली मछलियों के लिए लेक के कई हिस्से डेड स्पॉट बन गए हैं। यहां पानी में ऑक्सीजन की मात्रा पूरी तरह खत्म हो चुकी है। ऐसे में, इन हिस्सों में जाने वाली मछलियां कुछ ही देर में दम तोड़ सकती हैं। यह बात चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की रिपोर्ट में सामने आई है।
सुखना लेक में पिछले दिनों अचानक मछलियों और माइग्रेटरी बर्डस के मरने का सिलसिला शुरू होने के बाद डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ ने इसके कारणों को खंगालने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी प्रक्रिया के तहत पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी को सुखना के पानी की जांच करने का काम सौंपा गया था।
पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने सुखना के विभिन्न हिस्सों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए लैबोरेटरी भेजा गया था। कमेटी के अधिकारियों के मुताबिक लैबोरेटरी की रिपोर्ट में सामने आया है कि पानी के नमूनों में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम है।
कई हिस्सों में तो ऑक्सीजन लेवल जीरो है। इसलिए मछलियों दम तोड़ रही हैं। माइग्रेटरी बर्डस के मरने के ठोस कारण सामने नहीं आए हैं। कमेटी ने इसकी रिपोर्ट डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ को भेज दी है।
कचरा, काई, घास कर रहे हैं आक्सीजन खत्म: सुखना के पानी में आक्सीजन की मात्रा कम होने की मुख्य वजह लेक में यहां फेंका जाना वाला कचरा, पानी में पैदा हो रही काई, और पानी में पैदा होने वाले पौधे हैं।
सुखना में कचरे की वजह से काई और वनस्पति में इजाफा हो रहा है, जो पानी में घुली आक्सीजन को खींच रहे हैं। इसी तरह सुखना में फेंका जाने वाला कचरा सड़ने से उससे पैदा होने वाली गैस वगैरह भी आक्सीजन की मात्रा को खत्म कर रहे हैं, जिसकी वजह से मछलियों को सांस लेना मुश्किल हो रहा है।
मछलियों को चाहिए 3 से 6 एमजी/एल ऑक्सीजन
विशेषज्ञों के मुताबिक पानी में रहने वाली छोटी मछलियों के लिए करीब 5 से 6 मिलीग्राम/लीटर डिसॉल्वड ऑक्सीजन का होना जरूरी है, जबकि बड़ी मछलियां 3 से 4 मिलीग्राम/लीटर डिसॉल्वड ऑक्सीजन पर सरवाइव करती हैं।
यूं तो विभिन्न प्रजातियों की मछलियां अपने-अपने नेचर के मुताबिक डिसॉल्वड ऑक्सीजन पर सरवाइव कर लेती हैं लेकिन बड़े स्तर पर मछलियों को 3 से 6 मिलीग्राम/लीटर डिसॉल्वड ऑक्सीजन पर सरवाइवल के काबिल माना जाता है।
>> मेरे पास अभी कमेटी की रिपोर्ट नहीं आई है। वैसे सुखना में सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा मछली पालन विभाग को ऐसी मछलियां सुखना में डालने को कहा गया है, जो काई, घास को खाती हों। इसी तरह नगर निगम व पुलिस डिपार्टमेंट से भी बात की जा रही है ताकि सुखना में कचरा फेंकने पर अंकुश लगाया जा सके।
ईश्वर सिंह, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन