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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. चौटाला शासन में एचसीएस के 2002 भर्ती बैच में हुए भाई-भतीजावाद के बाद अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के मंत्री, कांग्रेसी विधायक और करीबी नौकरशाह भी सरकार में अपने रुतबे का फायदा उठाने के कारण विवादों में आ गए हैं।
हरियाणा अर्बन डवलपमेंट आथॉरिटी (हुडा) द्वारा जनवरी में भिवानी में किए गए इंडस्ट्रियल प्लॉटों की अलॉटमेंट हासिल करने वाले ज्यादातर नामों में मंत्री, कई विधायक, सरकार के करीबी नौकरशाहों के रिश्तेदार हैं। यह मामला सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के ध्यान में लाया गया।
हाईकोर्ट से पूरी अलॉटमेंट की जांच कराने और इसे कैंसिल करने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार समेत 44 वीआईपी लोगों को नोटिस जारी कर मामले में 8 अप्रैल को अपना पक्ष रखने को कहा है। इस बारे में जनहित याचिका भिवानी के एडवोकेट सत्यजीत और बबर भान ने दायर की है, जिस पर सुनवाई सोमवार को हुई।
इन वीआईपीज को नोटिस : मांगे राम गुप्ता- शिक्षा मंत्री हरियाणा, एमएल तायल- पिं्रसीपल सेकट्ररी सीएम, धर्मवीर- चीफ पार्लियामेंटरी सेकट्ररी, प्रो.छत्रपाल- विधायक, घिराय, शिवशंकर भारद्वाज- विधायक भिवानी, रामकिशन फौजी- विधायक, बवानी खेड़ा, रामभज अग्रवाल-पूर्व कांग्रेस विधायक, भिवानी, एचएसएसआईडीसी के एमडी राजीव अरोड़ा और उनकी पत्नी ज्योति अरोड़ा, टीसी गुप्ता-प्रशासक हुडा।
याचिका में कहा गया है कि ज्यादातर प्लॉट इन्हीं लोगों के रिश्तेदारों को अलॉट किए गए हैं। इसमें भेदभाव हुआ है और मापदंडों का पालन नहीं किया गया। यहां तक की एक विधायक की नौकरीशुदा रिश्तेदार कमला भारद्वाज के नाम पर भी प्लॉट अलॉट किया गया है।
जिनके लिए था उन्हें नहीं मिला
हुडा ने भिवानी में 26 इंडस्ट्रियल प्लाटों के आंवटन के लिए आवेदन मांगे थे। ये प्लॉट उनको अलॉट होने थे, जो पहले से छोटी इंडस्ट्री चला रहे हैं या जिनका प्लॉट एक्वॉयर हुआ था। अलॉटमेंट पर हुडा चेयरमैन ने 9 जनवरी 2008 को अप्रूवल भी दे दी।