न्यूयॉर्क. आपकी सांसों की महक यह तो बता देती है कि आपने क्या खाया-पीया है, लेकिन अब इसके जरिए बीमारियों की पहचान भी की जा सकती है। बीमारियों को पहचानने की इस आसान और सस्ती विधि में सांस में मौजूद विभिन्न रसायनों (बायोमार्कर्स) का पता लगाने में लेजर किरणों से पैदा हुए स्पेक्ट्रम का उपयोग किया जाता है। परीक्षण के पहले दौर में सफल रहने के बाद इस तकनीक का क्लीनिकल परीक्षण किया जाएगा।
कैसे होगी पहचान : शोधकर्ता जुन ये ने बताया कि इंसान की सांस में एक हजार से अधिक बायोमार्कस होते हैं। किसी की सांस में नाइट्रिक ऑक्साइड मिलने का अर्थ है कि उसे अस्थमा की शिकायत है, लेकिन इसका अर्थ यह भी निकाला जा सकता है कि संबंधित व्यक्ति फेफड़े की बीमारी, क्लाइस्टिक फाइब्रोसिस या फिर ब्रांकाइटिस का शिकार है।
कॉन से बायोमार्कर्स : सांस में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन परऑक्साइड, नाइट्राइट्स, नाइट्रेट, पेंटेन और ईथेन आदि की मौजूदगी को भी विभिन्न बीमारियों का संकेत माना जा सकता है। स्ट्रेक्ट्रम की मदद से सांस में इन रसायनों की मात्रा और घनत्व का आकलन करने के बाद रोग की पहचान की जाती है।
* ‘किसी ऐसे व्यक्ति की सांस की जांच करना बड़ा रोमांचक है, जिसमें सभी बड़े बायोमार्कर्स हों।’
- जुन ये, प्रमुख शोधकर्ता