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शायराना लालू

नई दिल्ली. वर्ष 2008-09 का रेल बजट पेश करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव अपने रंग में नजर आए और मजाकिया लहजे के साथ ही उनका शायराना अंदाज सदन में खिलखिलाहटों और ठहाकों का कारण बनता रहा।

उनके पूरे भाषण में कई जगह शायराना अंदाज दिखाई दिया। सबसे पहले उन्होंने अपने पिछले चारों बजट की सफलता को पेश किया :

सब कह रहे हैं हमने गजब काम किया है
करोड़ों का मुनाफा हर एक शाम दिया है
फल सालों ये अब देगा पौधा जो लगाया है
सेवा का समर्पण का हर फर्ज निभाया है।

इसके बाद लालू ने पिछली एनडीए सरकार पर व्यंग्य किया :

उजड़ा चमन जो छोड़ गए थे हमारे दोस्त
अब बात कर रहे हैं वो फस्ले-बहार की।

इसके बाद उन्होंने रेलवे के मुनाफे का मूलमंत्र बताते हुए कहा :

नई कथनी नई करनी नई एक सोच लाए हैं
तरक्की की नई पारसमणि हम खोज लाए हैं।

एक के बाद एक लालू ने अपने कार्यकाल में रेलवे की उपलब्धियों को गिनाते हुए एक और शेर प्रस्तुत किया :

गोल पर गोल दाग रहे हैं हम हर मैच में
देश का बच्च-बच्च बोले चक दे रेलवे।

रेलवे में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी उन्होंने शायराना फल्सफे में बांधा :

लेकर चला हूं सबको तरक्की की राह पर
एक नींव साझेदारी की मैंने रखी नई।

रेलवे कर्मचारियों के बारे में घोषणाएं करने से पहले लालू ने रेलवे कर्मचारियों की निष्ठा और मेहनत बताई :

समर्पित जिसका जीवन राष्ट्र सेवा में हमेशा है
कड़ी मेहनत करे जो वो सिपाही रेलकर्मी है।

अपने पिछले बजट से कुछ और बेहतर घोषणाओं का दावा भी उन्होंने किया :

जादू और टोना हमने दिखाया था पिछले साल
इस बार पूरा इंद्रजाल देख लीजिए।





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