संपादकीय. इस्लाम की धार्मिक विचारधारा की कई शाखाएं इतिहास में दर्ज हैं। इन्हीं शाखाओं की कोख से आधुनिक इस्लाम के विभिन्न संप्रदाय और स्कूल पैदा हुए। उन्हीं में से एक दारुल उलूम देवबंद भी है। देवबंद स्कूल भारत ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया में इस्लाम का सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित स्कूल है। उसने देश के दूसरे महत्वपूर्ण इस्लामी संगठनों के साथ मिलकर गहन आत्ममंथन के बाद यह घोषित किया है कि ‘जेहाद’ के नाम पर की जाने वाली गतिविधियां और निर्दोष व मासूम लोगों का कत्लेआम ‘गैर-इस्लामी’ है।
आतंकवाद ‘इस्लामी जेहाद’ नहीं है, इसलिए जो लोग इस्लाम और कौम को खतरे में बताकर ऐसी हरकतें करते हैं उन्हें धार्मिक जेहादी कहने की बजाय शुद्ध रूप से आतंकवादी ही माना जाना चाहिए। ध्यान रहे कि देवबंद स्कूल इस्लाम के उदारवादी और आधुनिक स्कूल के तौर पर नहीं जाना जाता, बल्कि खांटी तौर पर एक गहरी धार्मिक इस्लामी मान्यताओं का पैरोकार रहा है। ऐसे में देवबंद स्कूल का यह कदम क्रांतिकारी कहा जाएगा।
देवबंद की इस साहसिक घोषणा को ‘धार्मिक फतवे’ की श्रेणी में रखा जाए या नहीं, इस पर तकनीकी बहस हो सकती है, पर जिस बेबाकी के साथ उसने हिंसक आतंकवादी गतिविधियों को गैर-इस्लामी करार दिया है, वैसी हिम्मत अभी तक दुनिया के किसी इस्लामी धर्म-संगठन ने नहीं दिखाई है। आधुनिक और उदारवादी कहे जाने वाले मुस्लिम बुद्धिजीवी समय-समय पर आतंकवादी घटनाओं की निंदा-आलोचना जरूर करते रहे हैं, लेकिन इस्लाम के अनुयायियों में उनकी पहुंच और प्रभाव सीमित ही रहा है।
पाकिस्तान के हालिया चुनाव में कट्टरपंथी इस्लाम की वकालत करने वाले संगठनों को मिली करारी शिकस्त के साथ देवबंदी घोषणा को जोड़कर देखने से समूचे भारतीय उप महाद्वीप में इस्लाम के एक नए मिजाज के उभार के दर्शन होते हैं। इसे सिर्फ 9/11 का प्रभाव नहीं कहा जा सकता। उसने तो इस्लाम के अनुयायियों में एक डर पैदा किया था, जिसे आतंकवादियों ने अपने लिए सहानुभूति के कवच के तौर पर इस्तेमाल किया।
असल में इस दृष्टिकोण परिवर्तन की जड़ें कहीं अधिक गहरी हैं, जिसका संबंध मुस्लिम समुदाय में इन चीजों को लेकर पैदा हो रहे व्यर्थता-बोध और उनके धार्मिक संगठनों में आ रहे अप्रासंगिकता-बोध से है। जो भी हो, देवबंद की इस सुविचारित घोषणा का स्वागत होना चाहिए और दूसरे धर्र्मो के कट्टरपंथियों को भी इससे सीख लेनी चाहिए। शायद इसी से अंतर-धार्मिक सद्भाव की कोई नई धारा निकले और मानवता को कुछ राहत पहुंचाए।