बीकानेर. राजस्थान सूचना आयोग ने उदयरामसर निवासी एक पुस्तकालयाध्यक्ष के परिवाद पर जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) गणोशाराम निमामा पर पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। परिवादी बालकिसन यादव ने 23 अक्टूबर 2007 को माध्यमिक शिक्षा आयुक्त के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत किया था। यादव ने वर्ष 1991-92 में पुस्तकालयाध्यक्षों की भर्ती के आवेदन-पत्रों के संबंध में सूचना मांगी थी।
आयुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) को सूचना उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। सूचना आयोग का पत्र मिलने के बाद आयुक्तालय में पुस्तकालयाध्यक्षों के रिकार्डो की छानबीन शुरू हुई लेकिन आवेदन-पत्र नहीं मिले। उस वक्त सैकड़ों पुस्तकालयाध्यक्षों को नियुक्तियां दी गई थी। शिक्षा आयुक्त ने इस संबंध में जब सूचना आयोग को जवाब लिखा तो आयोग संतुष्ट नहीं हुआ।
आयोग ने दिसंबर 2007 में आदेश की पालना नहीं करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तथा अभिलेख गायब करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे, जबकि विभाग ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाकर इतिश्री कर डाली। इस प्रकरण में हाल ही में माध्यमिक शिक्षा आयुक्तालय के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) एफ.आर.सोनी की पेशी हुई थी।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना की प्रकरण में लापरवाही बरती गई है। पहले रिकार्ड दिखाने में विलंब किया गया। उसके बाद आयोग द्वारा द्वितीय अपील में दिए गए निर्देशों की पालना में भी अनुचित रूप से विलंब हुआ है। आयोग ने प्राथमिकी दर्ज नहीं करवाने को गंभीर माना है।
आयोग ने अपने निर्णय में एफ.आर.सोनी द्वारा बताए गए तथ्यों को देखते हुए इस प्रकरण में देरी के लिए मुख्य रूप से जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) गणोशाराम निमामा को दोषी ठहराया है। डीईओ पर पांच हजार रुपए जुर्माना तथा दो हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में परिवादी को अदा करने के आदेश दिए हैं।