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अवैध कनेक्शन से सिंचाई

बीकानेर.tower सूडसर के एक खेत में पाइप लाइनों को जमीन पर बिछाकर उसमें से 11केवीए की लाइन ली गई। इस लाइन को सुपर ट्रांसफार्मर से जोड़कर एलटी सप्लाई कुएं को दी गई और खेत में सिंचाई होने लगी। मजे की बात जिस लक्ष्मणराम के खेत में यह कनेक्शन चल रहा है, उसके संबंध में विद्युत निगम को कुछ पता भी नहीं है। विद्युत निगम के खाते में इस तरह का कोई भी कृषि कनेक्शन है भी नहीं।

श्रीडूंगरगढ़ में अधिकारियों के बैठने और सूडसर तक लगातार निगरानी होते रहने के बाद भी कोई यह नहीं जानता कि यह अवैध रूप से लिया गया कनेक्शन कितना पुराना है। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिशासी अभियंता (सतर्कता) के.आर.मेहता के नेतृžव में गई टीम ने इस अवैध रूप से लिए जा रहे कनेक्शन को पकड़ तो लिया है लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि यह गोरखधंधा कब से चल रहा था।

अधिकारियों का हालांकि इस बात से इंकार नहीं है कि इसमें विभाग से जुड़े हुए लोगों का हाथ हो सकता है लेकिन अभी तक इस संबंध में जांच शुरू नहीं हुई है। पहले इस मामले की एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। निगम के सतर्कता अभियान के दौरान यह मामला तब सामने आया जब दल सूडसर पहुंचा। यहां लक्ष्मणराम ने अपने खेत में कृषि कनेक्शन नहीं होने के बाद भी करीब दो सौ फीट दूसरी से निगम की लाइन से तार खींच रखे थे।

तार को पाइप लाइन में डालकर जमीन पर बिछा दिया गया और इससे सुपर ट्रांसफार्मर जोड़ दिया गया। इस तरह खेत का कुआं चलने लगा। जांच दल का मानना है कि यह कार्य कोई भी अपने स्तर पर नहीं कर सकता। इसमें किसी न किसी विभागीय व्यक्ति का साथ है।

सांठगांठ

विद्युत चोरी अब नई बात नहीं रही है लेकिन चोरियों में विभागीय लोगों की संलिप्तता ने निगम के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। सूडसर के प्रसंग में सुपर ट्रांसफार्मर का उपयोग करना इस बात का प्रमाण है कि अवैध रूप से कनेक्शन देने में निगम का भी कोई व्यक्ति साथ था। विदित रहे कि सुपर ट्रांसफार्मर विद्युत निगम उपलब्ध करवाता है। इसकी कीमत 50 हजार रुपए के करीब है। इसके अंदर ही मीटर होता है।

अगर कोई इसे तोड़ता है तो उसके खिलाफ निगम की धारा 138 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस धारा में सरकारी सामान की तोड़फोड़ करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसे में किसी को सुपर ट्रांसफार्मर अवैध कनेक्शन के लिए उपलब्ध करवाना तो बड़ा अपराध होगा। अगर जांच में ट्रांसफार्मर उपलब्ध करवाने वाले का पता चल जाए तो सरकारी संपत्ति को बेचने का मामला बन सकता है।

हालांकि इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। पिछले दिनों एक मामले में निगम कर्मियों की सांठ-गांठ साबित हो चुकी है। हालांकि अब तक अवैध कनेक्शन करवाने, ट्रांसफार्मर का ऑयल चुराने आदि के मामले प्रकाश में आए थे। ट्रांसफार्मर उपलब्ध करवाने का यह बड़ा मामला है।





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