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बैग रख लिए शिक्षकों ने प्रचार सामग्री बच्चों को

जयपुर. जयपुर के नजदीक जमवारामगढ़ पंचायत समिति के कई सरकारी स्कूलों में ईसाई धर्म की प्रचार सामग्री बंटने से माहौल गर्मा गया है। ईसाई मिशनरीज की कुछ संस्थाओं ने धर्म प्रचार के सिलसिले में सरकारी स्कूलों को चुना। बच्चों को धार्मिक प्रचार सामग्री देने के साथ-साथ शिक्षकों को लैदर के बैग देकर लुभाया गया। मामला जब उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो आनन-फानन में जांच शुरू हुई।

स्कूल प्रशासन ने कार्रवाई के डर से काफी सामग्री खुर्द-बुर्द कर दी। बीईईओ विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि कुछ दिन पहले हुए इस घटनाक्रम की शिकायत मिलने पर सभी स्कूलों को सामग्री सीज करने के निर्देश दे दिए गए हैं। वे खुद इस मामले की जांच कर रहे हैं। गुरुवार को स्कूलों का दौरा करेंगे।

बच्चों के मुंह बंद : स्कूलों में इस मामले को लेकर बच्चों के मुंह पर जैसे ताला लगा दिया गया है। कुछ बच्चों ने कहा कि पिछले दिनों गाड़ी में बैग और कुछ धार्मिक सामग्री आई थी। एक बच्चे ने दबी जुबां में बताया कि उन्हें तो सिर्फ पंपलेट और कुछ किताबें ही दी गईं थी जिन्हें दुबारा टीचर ने ले लिया।

‘भास्कर’ ने किया स्कूलों का दौरा

राप्रा विद्यालय करेला की ढाणी (नटाटा)

शुरुआत राप्रा विद्यालय करेला की ढाणी (नटाटा) से की। सरपंच प्रभुदयाल मीणा के घर पहुंचकर मामले के बारे में पूछताछ की तो पहले तो वे मुकर गए। शिक्षिका शशि गुप्ता ने बताया कि कुछ दिन पहले टैक्सी में कुछ लोग आए और ईसाई धर्म की सामग्री बांट गए।

उस वक्त लंच का समय था इसलिए वे और प्रधानाचार्य विजयलक्ष्मी जब तक उन लोगों से परिचय लेतीं, वे रवाना हो गए। बीईईओ की ओर से स्पष्टीकरण मांगने पर पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा भी लिख भेजा है। बाद में सरपंच मीणा ने भी घटना स्वीकारी।

राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल नारदपुरा

स्कूल प्रधानाध्यापक हरबंस शर्मा ने पहले टालमटोल की, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि ईसाई मिशनरीज के कुछ लोग कैंपस में धार्मिक सामग्री वितरित कर गए। लैदर बैग के बारे में वे बोले कि वे कुछ बैग कैंपस में छोड़कर चले गए थे।

स्कूल की कुछ शिक्षिकाओं का कहना था कि लंच टाइम होने के कारण वे सामग्री वितरित करने आए लोगों से मिल नहीं परई, लेकिन बच्चों से सामग्री एकत्र कर आगे सौंप दी गई। स्कूल कैंपस में मौजूद एक ग्रामीण महिला का कहना था कि ऐसे बैग अन्य कई स्कूलों में दिए गए हैं।





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