जयपुर. शीतलहर और पाले से हुए फसली नुकसान के मुद्दे पर बुधवार को विधानसभा में सरकार घिर गई। नुकसान के आंकलन के लिए हो रही गिरदावरी की निष्पक्षता पर विपक्ष के साथ पक्ष के सदस्यों ने भी सवालिया निशान लगाए। विपक्ष ने सरकार के अंतरिम राहत पैकेज को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए इसे किसानों के साथ छलावा बताया। आपदा एवं राहत मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।
सत्तापक्ष ने शीतलहर और पाले को केन्द्रीय आपदा राहत नियमों में शामिल करने के लिए सदन में संकल्प भी पारित कराया। दोनों पक्षों के सदस्यों ने किसानों को प्रति बीघा की दर से मुआवजा देने की मांग की। पूर्व आपदा एवं राहत मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने तो यहां तक सुझाव दे दिया कि पांच गांवों के किसानों की कमेटी बनाकर उसकी मौजूदगी में ही गिरदावरी होनी चाहिए।
विपक्षी सदस्यों का कहना था कि मुआवजे और बिजली बिल माफ करने के मामले में लघु और सीमांत किसानों की बाध्यता हटाकर सभी किसानों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए। राहत मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे के वक्तव्य से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। हालांकि दवे ने आश्वासन दिया कि वे निष्पक्ष गिरदावरी कराएंगे।राज्य सरकार ने इसके लिए 10 फरवरी को ही नुकसान के आंकलन के आदेश दे दिए थे।
चूंकि आपदा राहत नियमों के तहत किसानों को मदद नहीं दी जा सकती थी, इसलिए नियमों में संशोधन कराने के लिए मुख्यमंत्री के स्तर पर काफी प्रयास किए गए। जब केन्द्र की सरकार ने सुनवाई नहीं की तो राज्य सरकार ने अपने स्तर पर आगे बढ़कर 126 करोड़ रुपए के अंतरिम राहत पैकेज की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि यह पैकेज ही अंतिम नहीं है, यदि गिरदावरी रिपोर्ट के अनुसार नुकसान ज्यादा होता है तो सरकार उसमें भी राहत देगी। दवे ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य में निष्पक्ष रूप से गिरदावरी कराई जाएगी।
ऐसे आया सदन में संकल्प
दवे ने वक्तव्य में कहा कि किसानों के हित में प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए कि केन्द्र सरकार केन्द्रीय आपदा राहत कोष के नियमों में बदलाव करके शीतलहर और पाले को भी प्राकृतिक आपदाओं में शामिल करे। इस पर कांग्रेस के सीपी जोशी, प्रद्युम्न सिंह और नेता प्रतिपक्ष हेमाराम चौधरी ने कहा कि सरकार के पास आपदा राहत कोष के 430 करोड़ रुपए बचे हुए हैं। सरकार इस राशि को योजना मद में खर्च करना चाहती है।
यदि सरकार किसानों को 430 करोड़ रुपए तक की राहत देती है तो वे सीआरएफ के बचे हुए पैसे को योजना मद में शामिल करने पर राजी हो जाएंगे। इस पर राजेन्द्र राठौड़ ने दवे से यह संकल्प रखवा दिया कि यह सदन सर्वसम्मति से संकल्प पारित करता है कि शीतलहर और पाले को आपदा राहत नियमों में शामिल किया जाए।