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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. कलेक्टर सुबोध सिंह ने एनटीपीसी, सीपत के प्रबंधन से प्लांट में नौकरी चाहने वाले विस्थापितों की वरिष्ठता सूची मांगी है। राजधानी रायपुर में मंगलवार को एनटीपीसी प्रबंधन के सीएमडी टी शंकरलिंगम तथा मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सहित प्रदेश के आला अधिकारियों के बीच बैठक विफल होने के बाद जिला स्तर पर नई पहल की गई।
समझा जाता है कि प्रबंधन द्वारा 14 जनवरी को पहले दौर की बातचीत में रखे गए 692 विस्थापितों को नौकरी देने के प्रस्ताव पर अमल के लिए कवायद शुरू की जा रही है। इधर प्लांट के मटेरियल गेट के समक्ष विस्थापितों का धरना आंदोलन 37 वें दिन जारी रहा। बताया जा रहा है कि आंदोलन को तेज करने तथा प्लांट के अंदर कामकाज पूरी तरह ठप करने के लिए गुरुवार से विस्थापितों द्वारा ठेकेदार व श्रमिकों से आग्रह किया जाएगा।
विस्थापितों द्वारा आंदोलन के सिलसिले में रविवार से राजधानी चले जाने के दौरान पुलिस की मौजूदगी में मशीनरी तथा ठेकेदार व श्रमिकों के प्लांट में प्रवेश के बाद कामकाज चालू हो गया है। विस्थापितों ने इसे प्रबंधन द्वारा गुमराह करने की चाल बताते हुए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया है। कलेक्टर ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि एनटीपीसी के मानव संसाधन विभाग के अधिकारियों से कहा गया है कि वे वर्ष 2000 में बनी पुनर्वास नीति के अंतर्गत विस्थापितों की कुशल व अकुशल श्रेणी का खाका प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि वास्तविक विस्थापित तथा उनकी योग्यता की जानकारी मिलने के बाद उनका पुनर्वास ज्यादा आसानी से हो सकेगा।
सीपत में तनाव से इनकार
कलेक्टर ने सीपत में तनाव से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि प्लांट में किसी को काम करने से जबरन नहीं रोका जा सकता। जरूरत के मुताबिक सीपत के लिए फोर्स भेजी जाती है।
विस्थापित जाएंगे हाईकोर्ट
विस्थापित आंदोलनकारियों ने कहा है कि प्लांट में नौकरी की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। इसके लिए हाईकोर्ट में एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ याचिका दायर की जाएगी। इसी प्रकार दिल्ली में सांसदों के जरिए केंद्रीय उर्जा मंत्रालय, प्रधानमंत्री आदि तक विस्थापितों की मांग पहुंचाई जाएगी।