कोटा.
पांच अनाथ बच्चों से संस्था का सफर शुरू करने वाली प्रसन्ना भंडारी संस्था की संयोजिका है। जिनके प्रयासों से सैकड़ों अनाथ बच्चों को नया व उज्जवल जीवन मिला। वे आत्मनिर्भर बने और समाज ने उन्हें अपनाया। लावारिस हाल फेंके गए 600 से अधिक शिशुओं को गोद देकर उन्हें अभिभावकों का संरक्षण दिया है।
संस्था ने असहाय महिलाओं को भी शरण देकर उनमें जीने की चाह पैदा की है। लावारिस हालत में मिलने वाली विक्षिप्त महिलाओं को आश्रय देकर उनका उपचार कराकर पुन: उनके परिवार से मिलाया। बालिग हो चुकी कई अनाथ बालिकाओं को परिणय सूत्र में बांधा है। संस्था वर्तमान में सौ से अधिक अनाथ बच्चों, लावारिस फेंके गए 10 बच्चों, 28 बुजुर्ग, एक दर्जन से अधिक विक्षिप्त महिलाओं को नई राह दिखा रही है।
75 वर्षीय प्रसन्ना भंडारी में कार्य करने की ऊर्जा लोगों के लिए अनुकरणीय है। उनके सेवा कार्र्यो के कारण ही कोटा शहर उन्हें ‘कोटा की मदर टेरेसा’ का खिताब दे चुका है। इस संस्था ने एक ओर जहां बच्चों को बुजुर्र्गो का साया दिया है तो वहीं दूसरी ओर बुजुर्र्गो को बच्चों का अपनापन भी दिया है।
संस्था का परिचय
गोरधनपुरा स्थित श्री करणी नगर विकास समिति एक गैर सरकारी स्वयंसेवी संस्था है। इसकी स्थापना 1958 में हुई और पंजीकरण वर्ष 1989 में राजस्थान सरकार और केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड से हुआ था। संस्था द्वारा बच्चों के लिए ‘ममता’ भवन, निराश्रित व विक्षिप्त महिलाओं के लिए ‘आश्रय’ भवन और बुजुर्र्गो के लिए ‘श्रद्धा’ भवन संचालित है। यहां परेशान हाल महिलाओं के लिए परिवार परामर्श केंद्र के साथ-साथ अन्य सामाजिक गतिविधियां भी संचालित है।
संस्था की उपलब्धियां
इस संस्था द्वारा की जाने वाली बाल कल्याण सेवाओं के लिए वर्ष 1988 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कर इसे राज्य की सर्वश्रेष्ठ सामाजिक संस्था के सम्मान से सम्मानित किया गया। राजस्थान सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ सामाजिक संस्था का पुरस्कार, राजस्थान वेलफेयर एसोसिएशन बंबई द्वारा नाहर सम्मान पुरस्कार के साथ ही कई पुरस्कारों से इस संस्था को नवाजा है। इस संस्था ने पिछले 50 वर्र्षो में हजारों अनाथ बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है।