कोटा.
देशभर में 24 घंटे पानी की सप्लाई के लिए जाना जाने वाला कोटा शहर अब फरवरी माह में ही पानी की समस्या से जूझने लगा है।शहर में उद्योग नगर, प्रेमनगर, अनंतपुरा, विज्ञान नगर, तलवंडी, शॉपिंग सेंटर, गुमानपुरा, बापू नगर, छावनी, संजय नगर, इन्दिरा गांधी नगर, स्टेशन क्षेत्र आदि में पानी कम दबाव से पहुंच रहा है।
एडीबी परियोजना में 65 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने के बावजूद शहर हो बेहतर पेयजल सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। जलदाय विभाग का कहना है स्थिति में सुधार इंटैकवैल बनने के बाद ही हो पाएगा। परियोजना में 18 टंकियां बनाई गई है। इनमें से केवल पांच ही पाइप लाइनों से जुड़ पाई है। बाकी को जोड़ने का कार्य चल रहा है। जलदाय विभाग इस कार्य में देरी कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि टंकियों को लाइन से जोड़ देंगे तो उनमें भरने के लिए पानी कहां से लाएंगे। इस समस्या के कारण नई व्यवस्था को पूरा लाभ शहरवासियों को नहीं मिल रहा।
सुधार के प्रयास जारी : विभाग ने गर्मी से पहले नई पाइप लाइनों को उपभोक्ताओं के कनेक्शनों से जोड़ने का प्रयास शुरू कर दिया है। इससे सप्लाई में सुधार होने की उम्मीद है। इसके साथ ही विभाग ने शहर में जगह-जगह लाइनों में हो रहे लीकेज भी रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रेशर की समस्या : शहर में उद्योग नगर, प्रेमनगर, अनंतपुरा, विज्ञान नगर, तलवंडी, शॉपिंग सेंटर, गुमानपुरा, बापू नगर, छावनी, संजय नगर, इन्दिरा गांधी नगर, स्टेशन क्षेत्र में पानी की सप्लाई तो होती है, लेकिन उसमें प्रेशर नहीं होता।
23 टंकियां चालू : शहर में कुल 32 टंकियां हैं जिनमें से 23 चालू हालत में हैं। गत वर्ष 8 टंकियों को सप्लाई से जोड़ा गया। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में या तो पानी नहीं पहुंच रहा है या कम दबाव से पानी आता है।
हैण्डपंप के लिए सर्वे नहीं : शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अभी हैण्डपम्प सर्वे का काम भी पूरा नहीं हुआ है। जलदाय विभाग के अधिकारी कहते हैं कि संसाधनों की कमी एवं अन्य कार्यों में कर्मचारियों की व्यस्तता रहने के कारण अभियान प्रभावित होता है। अधिकारियों का मानना है कि इस बार समस्या बढ़ने वाली है क्योंकि बरसात ठीक नहीं हुई है।
कालोनियों में टैंकरों से सप्लाई : शहर की प्रेमनगर प्रथम, द्वितीय, तृतीय, गोविंदनगर, इंदिरागांधीनगर, अंबेडकर नगर व रीको क्षेत्र में लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए 41 टैंकर प्रतिदिन सप्लाई की जाती है।
इस बार परेशानी बढ़ सकती है। बारिश भी पर्याप्त नहीं हुई है। कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी हुई है तो कुछ में समस्या का समाधान भी हुआ है। विभाग योजनाओं के माध्यम से पेयजल संकट दूर करने की कोशि की गई है।
—आरके जैन, तकनीकी सहायक, जलदाय विभाग