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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. हरियाणा में अब स्कूल टीचर्स की भर्ती में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित रहेंगी। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र से दसवीं पास युवाओं को किसी प्रकार का आरक्षण नहीं मिलेगा। इस बारे में बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम व्यवस्था दी है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को कैंसिल कर दिया है, जिसमें उसने हरियाणा में ग्रामीण क्षेत्रों से 10वीं या 12वीं पास युवाओं को टीचर्स की भर्ती में 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था। हालांकि हाईकोर्ट के फैसले से राज्य कैबिनेट के उस फैसले पर मुहर लग गई है, जिसमें महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था।
भर्ती प्रकिया शुरू करने को कहा
इसके साथ ही हरियाणा में पिछले 2 साल से लटकी पड़ी 10 हजार टीचर्स की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को कहा है, लेकिन स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों ने रूरल रिजर्वेशन कोटे से अप्लाई किया था और वे किसी अन्य रिजर्व कैटेगिरी में नहीं आते, उन्हें जनरल कैटेगिरी में ही मानकर भर्ती करें।
महिलाओं को समानांतर आरक्षण
जस्टिस आशुतोष मोहंता और जस्टिस टीपीएस मान ने कहा कि ग्रामीण युवाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण देना मूलभूत अधिकारों का हनन होगा। महिलाओं को 33 फीसदी रिजर्वेशन भी हॉरिजेंटल (समानांतर) होगा। यानी हर कैटेगरी में से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
दो साल से लटकी थी भर्ती प्रक्रिया
हरियाणा सरकार ने जुलाई 2006 में राज्य में अलग-अलग विषयों के लगभग 10 हजार टीचर्स की भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसमें ग्रामीण क्षेत्र से 10वीं या 12वीं पास उम्मीदवारों को 50 फीसदी और महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान था। इस फैसले को कुछ उम्मीदवारों ने चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रिजर्वेशन देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
सरकार की सफाई
सरकार ने महिलाओं के रिजर्वेशन पर सफाई देते हुए कहा था कि हम महिलाओं को गल्र्स स्कूलों के लिए विशेष तौर पर भर्ती करना चाहते हैं ताकि स्कूली छात्राओं के यौन शोषण, छेड़छाड़ जैसे मामलों पर लगाम लगाई जा सके।