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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
पीजीआई में मधुमक्खी काटने की छुट-पुट घटनाएं तो हो चुकी हैं, लेकिन बुधवार को यहां डायरेक्टर ऑफिस के पास मधुमक्खियों के हमले ने यूटी के जूनियर इंजीनियर अशोक भंडारी (38) की जान ले ली। तीन लोग इमरजेंसी में दाखिल हैं, 10 लोगों को प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। अशोक भंडारी यूटी की पूर्व मेयर अनु चतरथ के कजन ब्रदर थे। दोपहर 2.30 बजे पीजीआई डायरेक्टर ऑफिस के आसपास लोग काम में बिजी थे।
मरीजों के परिजन बाहर बैठे थे। सिक्योरिटी के लोग अटेंडेंस के लिए लाइन में लगने की तैयारी में थे। अचानक बचाओ-बचाओ की आवाज आती है और अफरा-तफरी मच जाती है। हर कोई आवाज सुन कर भागने लगने लगता है। भागने वालों में कुछ ऐसे भी थे, जिनको पता नहीं था कि वे क्यों भाग रहे हैं।
वजह थी कैरों ब्लॉक के सामने लगे एक पेड़ से अचानक हुआ मधुमक्खियों का हमला। मधुमक्खियां अशोक भंडारी से चिपट गईं और उन्हें जगह-जगह काटा। इस हादसे के दो घंटे बाद अशोक की मौत हो गई। मधुमक्खियों के काटने से अमित (पीजीआई सिक्योरिटी में कर्मचारी), सुरिंदर कुमार (पीजीआई सिक्योरिटी में कर्मचारी) और फिरोज मौके पर ही बेहोश हो गए।
फिरोज पीजीआई में एसी ठीक करने आया था। इन तीनों को गंभीर हालत में पीजीआई इमरजेंसी भेजा गया। मधुमक्खियों के हमले में 10 लोग और जख्मी हुए। अशोक की कजन सिस्टर अनु चतरथ ने बताया कि अशोक पीजीआई इमरजेंसी में अपने किसी कलीग को देखने गए थे। उससे मिलकर लौटते वक्त अचानक सैकड़ों मधुमक्खियां उनसे चिपट गई। वो बड़ी मुश्किल से पीछा छुड़ा कर जैसे -तैसे वापस इमरजेंसी पहुंचे और टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया।
इंजेक्शन लगवा कर लौटते वक्त मधुमक्खियों ने फिर से उन पर हमला कर दिया। इस बार अशोक खुद को संभाल नहीं पाए और बेहोश हो गए। उन्हें पीजीआई इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां दो घंटे बाद उनकी मौत हो गई। अशोक के करीबी दोस्त योगेश कुमार ने बताया कि चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर के अशोक की पांच साल पहले ही शादी हुई थी। उनके कोई बच्च नहीं था।
कुछ जगहों पर ये छत्ते काफी बड़े हैं। शिकायत के बावजूद इनको नहीं हटाया गया। एक बार निगम कर्मचारी छत्ता हटाने आए और सीढ़ियां मांगी। पीजीआई के पास सीढ़ी न होने से वे लौट गए। डायरेक्टर ऑफिस के सामने मधुमक्खी के इस छत्ते की पहले भी सिक्योरिटी गार्ड ने शिकायत की थी, जिस पर ध्यान न दिए जाने के कारण ही यह हादसा हुआ।
जब इंतजाम ही नहीं, तो कौन डाले छत्ते में हाथ
दर्पण चौधरी
मधुमक्खियों का हमला पीजीआई के फायर ब्रिगेड ऑफिस से कुछ ही दूर हुआ, लोग भागते रहे, लेकिन कोई भी कर्मचारी बाहर नहीं आया। पीजीआई के फायर ब्रिगेड ऑफिस के पास इस स्थिति से निपटने के इंतजाम ही नहीं हैं, न तो ट्रेंड कर्मचारी और न ही सीढ़ियां। बुधवार को लोगों को इसी का खमियाजा भुगतना पड़ा।
इस विभाग पर पीजीआई लाखों रुपए खर्च जरूर करता है। पीजीआई के पास पहले फायर ब्रिगेड में छह लोगों का ट्रेंड स्टाफ था। लेकिन पीजीआई ने सिक्योरिटी गार्डस और फायर ब्रिगेड स्टाफ को मर्ज कर दिया। इस समय फायर ब्रिगेड का ट्रेंड स्टाफ रिटायर हो चुका है और सिक्योरिटी गार्डस ही काम कर रहे हैं।
सुरक्षित नहीं पीजीआई : पीजीआई में ऐसी कई जगह और भी हैं जहां मधुमक्खियों के छत्ते लगे हैं। पीजीआई के रिसर्च ब्लॉक, एडवांस आई सेंटर के पास और नेहरू ब्लॉक के पीछे कई जगह मधुमक्खी के छत्ते हैं।
कुछ जगहों पर ये छत्ते काफी बड़े हैं। शिकायत के बावजूद इनको नहीं हटाया गया। एक बार नगर निगम कर्मचारी छत्ता हटाने आए और सीढ़ियां मांगी। पीजीआई के पास सीढ़ी न होने के कारण वे उलटे पांव लौट गए।
गार्ड ने पहले भी की थी शिकायत : डायरेक्टर ऑफिस के सामने मधुमक्खी के इस छत्ते की पहले भी सिक्योरिटी गार्ड ने शिकायत की थी, जिस पर ध्यान न दिए जाने के कारण ही यह हादसा हुआ। पीजीआई में मधुमक्खिो ने पहले भी लोगों को काटा है, लेकिन इन मामलों को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।
रिसर्च ब्लॉक, नेहरू ब्लॉक के पास मधुमक्खी काटने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं, लेकिन पीजीआई ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पीजीआई का स्टाफ भी मधुमक्खियों का शिकार हो चुका है।