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चार अक्षरों की महिमा

विकास मंत्र. यहां मैं अंग्रेजी के उस चार अक्षरों वाले शब्द के बारे में बात नहीं कर रहा हूं, जिन्हें अशालीन और निषिद्ध माना जाता है। मैं यहां उन चार अक्षरों की बात करूंगा जिनसे ब्रांड का नाम बनता है। ऐसा नाम जिसमें चार मधुर अक्षरों के जरिये ब्रांड के गुणों और मूल्यों को ज्यादा अच्छी तरह याद रखा जाता है। दुनिया में तो ऐसे नाम हैं ही: नाइक, कोक। भारत में भी हैं: टाटा, बाटा, अमूल।

सिद्धांत यह है कि नाम सरल हो, याद रखने लायक हो। इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि वह अंग्रेजी के चार और हिंदी के दो या तीन अक्षरों से बना हो। आज जब रफ्तार ही जिंदगी की कुंजी है, ब्रांड नाम जितना छोटा हो उतना बेहतर। सबसे अच्छा ब्रांड नाम वह है जो तुतलाना शुरू कर रहे बच्चे की जुबान पर भी चढ़ जाए। औसत उपभोक्ता को दिन में औसतन 750 टेलीविजन ब्रांड संदेशों की बमबारी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में छोटे ब्रांड नाम याद रखना आसान है या दिमाग में ज्यादा जगह घेरने वाले? पांच या छह-सात अंग्रेजी अक्षरों के कुछ ब्रांड नाम इसलिए लोकप्रिय हैं क्योंकि उन्हें पुकारा दो अक्षरों में जाता है, जैसे धारा और राग।

जो ब्रांड चिल्लाते हैं, जरूरी नहीं कि काटते भी हों। छोटा, याद रखने में सरल औरखरीदारी के वक्त याद आ जाने वाला ब्रांड नाम चिल्लाता ही नहीं, काटता भी है। वह पहली खरीदारी के वक्त काटता है, जब खरीद प्राय: आवेग में की जाती है। खरीदारी करते वक्त एक निश्चित ब्रांड का टॉयलेट क्लीनर आप सिर्फ इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि कल शाम धारावाहिक ‘बेवॉच’ के दौरान देखा गया उसका विज्ञापन आपको याद आ गया था। अंत में, दक्षिण भारतीय होने के नाते मैं अपने प्रिय दक्षिणी व्यंजनों के जिक्र का लोभ संवरण नहीं कर सकता, जो अंग्रेजी के चार अक्षरों से बने हैं: इडली, डोसा, वड़ा, उपमा।

-लेखक प्रख्यात मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं।





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