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लफ्जों में सिमटी विकास की बातें

भोपाल. शहर के विकास के लिए चर्चाएं तो खूब होती हैं मुख्यमंत्री भी एक साल में दो बार समीक्षा बैठक कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है। नगर संवाददाता. भोपाल. राजधानी के विकास की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन धरातल पर काम होते नजर नहीं आते। एक साल में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान दो बार समीक्षा कर चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर नजर आता है।

विधानसभा में बुधवार को पेश प्रदेश के बजट में जिन 15 सड़कों के निर्माण का वादा किया गया है उनके लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का इंतजाम नहीं किया गया है। डेढ़ महीने पहले 16 जनवरी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी के विकास कार्यो की समीक्षा की थी। उन्होंने विकास कार्यो की धीमी गति पर अफसरों को लताड़ लगाई और हर काम के लिए समय सीमा निर्धारित की। डेढ़ महीने बाद पलट कर देखें तो इनमें से एक भी काम को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

12 दफ्तर की शिफ्टिंग

जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 12 शेड के दफ्तर की जमीन पर झुग्गीवासियों के लिए आवास बनना हैं। 12 दफ्तर की शिफ्टिंग 15 दिसंबर तक होना थी, लेकिन यह काम अटका हुआ है।

बीसीएलएल

राजधानी में स्टार बस का संचालन कर रही भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के गठन का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग में अटका हुआ है। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री जून में विभाग के अधिकारियों को इसे मंजूर करने के निर्देश दे चुके हैं।

करोड़ों के काम के लिए 17 लाख रुपए

विधानसभा में बुधवार को पेश बजट में राजधानी में 15 सड़कों के निर्माण की बात कही गई है। बजट में हर सड़क के लिए केवल एक लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इन सभी सड़कों के निर्माण पर कुल मिला कर 75 करोड़ रुपए खर्च होना है। सीधा सा अर्थ है कि इस वित्त वर्ष में इनमें से एक भी सड़क का काम शुरू नहीं हो सकेगा। इसी तरह 12 जी टाइप आवासों के निर्माण के लिए 53.72 लाख रुपएचाहिए लेकिन एक लाख रुपए दिए गए हैं। 100 जी और 100 एच टाइप मकानों का बाह्य विद्युतीकरण करने के लिए 66.71 लाख रुपए की जरूरत है और बजट में प्रावधान केवल एक लाख रुपए का है।





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