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कश्मीर की रिहाई का रास्ता साफ

चंडीगढ़.35 वर्ष से पाकिस्तान की जेलों में तनहाई काट रहे होशियारपुर के नंगलचौरां गांव के कश्मीर सिंह की रिहाई के कागजात पर परवेज मुशर्रफ ने दस्तखत कर दिए हैं और तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया है।

कश्मीर को 1973 में अपने साथी के साथ रावलपिंडी से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान आर्मी कोर्ट ने उसे सजा-ए-मौत दी थी। कश्मीर की रिहाई पाकिस्तान के केयर टेकर ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट मिनिस्टर अंसार बर्नी के प्रयासों से हो रही है। बर्नी बुधवार को लाहौर सेंट्रल जेल में कश्मीर से मिले थे और उन्हें बता दिया था कि उनकी फैमिली का पता चल गया है।

होशियारपुर के सांसद अविनाश राय खन्ना ने भास्कर को दिल्ली से फोन पर बताया, मुझे पता चला था कि बर्नी को कश्मीर का पता मालूम नहीं है। इसलिए मैंने ई-मेल के जरिए बर्नी को कश्मीर के परिवार के बारे जानकारी दी।

जेल रिकॉर्ड के साथ पहचान गुम:

बर्नी को पता चला था कि कश्मीर का जेल रिकॉर्ड गुम हो चुका है और उसकी पहचान इब्राहीम के रूप में हो गई थी। पूरे जेल जीवन में बर्नी से पहले उससे कोई भी मिलने नहीं आया था। इस पूरे दौर में उसे अपने परिजनों का एकमात्र पत्र मिला था जिसे वह अपने सीने से लगाए वक्त काट रहा है।

पंजाब पुलिस में था कांस्टेबल

कश्मीर सिंह पहले पंजाब पुलिस में कांस्टेबल था। बाद में अनुशासनात्मक कारणों से उसकी नौकरी चली गई। उस पर आरोप है कि नौकरी जाने के बाद वह पाकिस्तान से रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की तस्करी करने लगा। तस्करी के ही सिलसिले में एक बार जब वह अपने साथी के साथ पेशावर जा रहा था तो दोनों को जासूसी के आरोप में रावलपिंडी में सेना ने गिरफ्तार कर लिया।





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