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फीस पर तकरार, उड़नदस्ते तैयार

भोपाल. प्रदेश के मेडिकल एवं डेंटल कालेज संचालकों ने राज्य सरकार की प्रवेश एवं फीस विनियामक आयोग के उस फैसले का मानने से इंकार कर दिया है, जिसमें इन कॉलेजों की फीस काफी कम कर दी गई है। संचालकों ने निर्णय लिया है कि यदि आयोग ने दोबारा विचार नहीं किया तो वे सुप्रीम कोर्ट की शरण लेंगे।

फीस कमेटी ने निजी संस्थानों में मेडिकल और डेंटल कोर्स की फीस कम कर दी है। 1.85 लाख से 2.80 लाख रु. तक की फीस वसूल रहे कॉलेजों को 75 हजार से 1.97 लाख तक की फीस लेने को कहा गया है। इसे लेकर कालेज संचालक असंतुष्ट हैं। वे कमेटी से इस मामले पर दोबारा विचार करने की अपील कर रहे हैं।

यह है विवाद: संचालकों ने एक जैसे संसाधन वाले कॉलेजों के खर्च को अलग-अलग आंके जाने पर भी आपत्ति की है। गौरतलब है कि कुछ कॉलेजों की फीस में करीब एक लाख रुपए तक का अंतर किया गया है।

माशिमं की परीक्षा

पूरे समय रहेंगे उड़नदस्ते

प्रदेश में एक मार्च से शुरू होने वाली हाईस्कूल व हायर सेकंडरी बोर्ड परीक्षा के लिए लोकशिक्षण संचालनालय ने विशेष दस्तों का गठन किया है। इसमें प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम दो प्रश्न-पत्रों में पूरे समय उड़नदस्ते को मौजूद रहना अनिवार्य किया गया है। संचालयनालय ने गुरुवार को उड़नदस्तों के आदेश जारी किए। इसमें संचालनालय के अधिकारियों को संभागों का प्रभारी बनाया गया है। ये अधिकारी अपने अधिनस्थ पांच से सात दस्ते गठित करेंगे और जिलों का निरीक्षण करेंगे।

इन्हें कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों के दस्तों से भी तालमेल रखने के निर्देश दिए गए हैं। ये दस्ते केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षकों पर विशेष निगाह रखेंगे। इन्हें निर्देश दिए गए हैं कि केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षकों की कोई भी संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत सीधे संचालनालय को सूचित किया जाए।

9वीं-11वीं भी: इन्हीं उड़नदस्तों को 9वीं-11वीं की परीक्षा में भी निरीक्षण करने का जिम्मा दिया गया है। इसमें भी प्रत्येक केंद्र पर दो पेपरों में पूरे समय रुकने के निर्देश हैं।

किस अधिकारी को कौन सा संभाग: भोपाल अस्मा नसीर, इंदौर/होशंगाबाद केके पांडे, ग्वालियर पीएल अहिरवार, जबलपुर राजेंद्र प्रसाद, उज्जैन अरविंद चिंचौलीकर, रीवा सुरेश त्रिपाठी व सागर महेश जैन।

अधिकारी बोले

राज्य स्तर से परीक्षाओं की निगरानी के लिए विशेष दस्ते बनाए गए हैं। इन्हें हर केंद्र पर कम से कम दो पेपरों में पूरे समय मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। वे अधीनस्थ दस्तों के जरिए प्रक्रिया पूरी करेंगे।

—बीआर नायडू, आयुक्त, लोकशिक्षण





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