भोपाल. बुंदेलखंड समेत राज्य के अनेक जिलों में पड़े सूखे को लेकर चिंतित विधायकों ने इस मसले पर इतना हंगामा मचाया कि असली मुद्दा नेपथ्य में चला गया और आरोप-प्रत्यारोप में सदन डूब गया।
सरकार के जवाब और मंत्री द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोप से नाराज विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया। हंगामा रोकने में विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी की यह नसीहत भी काम नहीं आई जिसमें सभी सदस्यों को मर्यादा में रहने की बात इस तर्क के साथ कही गई थी कि हमें राज्य की छह करोड़ जनता देख रही है। यह मामला प्रश्नकाल का था।
जद यू की सरोज बच्चन नायक का सवाल था मगर उनकी गैरमौजूदगी में कांग्रेस के सज्जनसिंह वर्मा ने पूरक सवाल दागते हुए राजस्व मंत्री से जानना चाहा कि सूखे के कारण किसानों को कुल कितना नुकसान हुआ। राजस्व राज्य मंत्री कमल पटेल की गैरमौजूदगी में राज्य मंत्री नारायणसिंह कुशवाह इसका सीधा जवाब नहीं दे पाए।
इससे नाराज श्री वर्मा ने जानना चाहा कि राज्य सरकार ने सूखा राहत मद में केंद्र से कितनी राशि की मांग की है। मंत्री द्वारा 24 हजार करोड़ की रकम बताने पर श्री वर्मा ने कहा कि नुकसान 24 हजार करोड़ का हुआ और राज्य सरकार द्वारा किसानों को मात्र 50 करोड़ की रकम बांटी गई। कांग्रेस सदस्यों ने इस पर जमकर शोरगुल मचाया और सरकार से पूछा कि किसान कब तक कष्ट भोगता रहेगा?
संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्र की इस टिप्पणी के बाद सदन हंगामे में डूब गया कि आपके (केंद्र सरकार) कारण किसान कष्ट भोग रहा है। कांग्रेंस के दिग्विजय सिंह ने पूछा कि सरकार के आपदा राहत कोष में वर्तमान में कितनी राशि ह,पर इसका भी कोई जवाब नहीं आ पाया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सदस्य एक साथ खड़े होकर बोलने लगे। हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी ने सरकार पर किसान विराधी होने का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट करने का एलान कर दिया।
विपक्ष के विधायको के दोबारा सदन में आने के बाद भी हंगामा कम नहीं हुआ। विपक्षी सदस्य अध्यक्ष पर दबाव बना रहे थे कि वे श्री मिश्रा द्वारा केंद्र सरकार के बारे में की गई टिप्पणी को विलोपित करें,पर अध्यक्ष ने इससे साफ इंकार कर दिया। कांग्रेस के आरिफ अकील और कृषि मंत्री गोपाल भार्गव में भी कुछ कहासुनी हो गई और श्री अकील नोट लहराते हुए दिखाई दिए। इस पर अध्यक्ष ने सभी सदस्यों को नसीहत दी कि वे सदन को मर्यादा के अनुरुप चलाए। राज्य की छह करोड़ जनता हमारी ओर देख रही है। इसके बाद भी सदन में हंगामा मचता रहा। हंगामे के समापन तब हुआ जब अध्यक्ष ने प्रश्नकाल समाप्त होने की घोषणा कर दी।