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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. सफल टेस्ट आफ सिंक्रोनाइजेशन के 9 माह बाद गुरुवार को बिजली उत्पादन की दिशा में एनटीपीसी प्रबंधन ने अंतिम तैयारी कर ली है। आज चिमनी को लाइनअप कर बायलर जला लिए गए। आसपास के लोगों ने चिमनी से धुंआ उड़ता भी देखा। अब एनटीपीसी में कोल फायरिंग अब-तब में है।
पिछले साल 27 मई को सीपत एनटीपीसी में सफल टेस्ट आफ सिंक्रोनाइजेशन किया गया था। इस दौरान 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया था। इसके तीन माह या 90 दिन के भीतर सीपत में 500 मेगावाट बिजली उत्पादन चालू हो जाना था, लेकिन प्रबंधन इसमें असफल रहा। मई के बाद हुई बरसात, अधिकारियों के नौकरी छोड़कर जाने व लगातार प्रबंधन के खिलाफ चले आंदोलन के चलते मामला लटकता चला गया। वर्तमान में भी सभी भू-विस्थापितों को नौकरी देने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है और पिछले एक-दो दिन में यह आंदोलन कुछ कमजोर पड़ा है।
बड़ी संख्या में मजदूर आंदोलन से किनारा कर काम पर जा चुके हैं और यह क्रम लगतार जारी है। इस बीच एनटीपीसी प्रबंधन ने भी बिजली उत्पादन चालू करने की दिशा में पूरा जोर लगा दिया। ग्राम रांक की अधूरी पड़ी पाइप लाइन को पहले ही पूरा लिया गया है और ऐश डेम तक पानी छोड़कर सफल परीक्षण भी कर लिया है। गुरुवार को प्रबंधन ने स्टेज टू की चिमनी को बिजली उत्पादन के हिसाब से लाइन अप भी कर लिया। इसके साथ ही बायलर भी जला दिए गए हैं।
दिन में कोल फायरिंग चालू नहीं की गई थी। एनटीपीसी सूत्रों के मुताबिक गुरुवार देर रात या शुक्रवार को कोल फायरिंग की जा सकती है। इसके साथ ही सीपत में अब 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन चालू हो जाएगा। तकरीबन 9 साल के इंतजार के बाद सीपत में बिजली उत्पादन चालू होने की पूरी संभावना बन गई है। 1998 में स्थापना के बाद 2002 में यहां के काम में तेजी आई थी। सीपत में 500-500 मेगावाट की दो व 660-660 मेगावाट की तीन यूनिट से कुल 2980 मेगावट बिजली का उत्पादन यहां से होना है। देश में बिजली की कमी को देखते हुए सीपत में होने वाला उत्पादन बहुत महत्वपूर्ण है।