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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर/सीपत. इसे दोस्ती पर परवान चढ़ाने की तरकीब कहें या जीवन भर साथ रहने की चाहत, बचपन से साथ पली-बढ़ीं दो युवतियों को अपना याराना इतना भा गया कि उन्होंने आपस में शादी रचा डाली। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन सीपत क्षेत्र की इन युवतियों ने समाज, परिवार ही नहीं, बल्कि प्रकृति के नियम भी बदल डाले। अब वे सहेलियां एक-दूसरे की हमसफर बनकर जिंदगी जीना चाहती हैं।
शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खांड़ा में घटी इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में सरगर्म रही। घर से भागी दो बचपन की सहेलियों ने रतनपुर के मंदिर में शादी कर ली और लगभग 10 दिन बाद घर लौटीं। सीपत थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खांड़ा निवासी ननकी मानिकपुरी और उपलुदास मानिकपुरी के घर आमने-सामने हैं। बचपन से ही ननकी की पुत्री सरस्वती और उपलू की बेटी उर्वशी के बीच गहरी मित्रता थी। खेलकूद, पढ़ाई, मौज-मस्ती, सब कुछ दोनों एक साथ ही करती थीं।
बचपन की ये दोस्ती न जाने कब दोनों के मन में प्यार का बीज बनकर फूट पड़ी। दोनों मन ही मन एक-दूसरे को चाहने लगे। उनके प्यार पर इस तरह परवान चढ़ा कि इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए वे दुनिया की रस्मों और घर-परिवार, समाज तक को छोड़ने के लिए राजी हो गए।
18 फरवरी को दोनों एक साथ घर से भाग गईं। दोनों सीधे रतनपुर स्थित महामाया मंदिर पहुंचीं। वहां उन्होंने आपस में शादी कर ली। मां महामाया के सामने साथ जीने-मरने की कसम खाकर दोनों अपने एक रिश्तेदार के घर कोरबा चली गईं। इधर सरस्वती के पिता ननकी ने सीपत थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। 27 फरवरी को दोनों एक साथ गांव वापस लौट गईं। परिवार वालों को जब दोनों युवतियों की शादी की खबर मिली तो उनके होश उड़ गए। ननकी ने तुरंत इसकी सूचना सीपत थाने में दी। पुलिस ने दोनों को थाने बुलवाया। वहां पूछताछ में युवतियों ने सबके सामने शादी की बात स्वीकार ली। हस्तक्षेप के लिए अयोग्य मामला पाते हुए पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों को वापस लौटा दिया।