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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
आटो, रिक्शा व तांगा चालकों की हड़ताल ने दूसरे ही दिन दम तोड़ दिया। रिक्शा चालकों ने बगावत कर आज रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। शहर व स्टेशन क्षेत्र में भी आज रिक्शा चलते दिखाई दिए। आटो नहीं चलने से लोगों को होने वाली परेशानी को ध्यान में रखते हुए तगड़ी व्यवस्था कर रखी थी। सिटी बस के अलावा निजी बसों को भी स्टेशन क्षेत्र के होकर भेजा जा रहा था, साथ ही शहर व आसपास के क्षेत्रों के लिए भी मिनी बस व जीप की व्यवस्था की गई थी।
दो ही दिन में लोग आटो को भूल गए हैं। स्टेशन से बस स्टैंड जाने वाली बस में सवार अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सिटी बस लोगों की जरूरत बन गई है। आटो चालकों का विरोध गलत है। कुछ ऐसा ही कहना उनकी पत्नी कुसुमलता सिंह का भी था। उनका कहना था कि अब भी लोगों को आटो की आवश्यकता पड़ती है। सिटी बस से लोग मुख्य चौक-चौराहों तक पहुंच सकते हैं, सामान लेकर घर के दरवाजे तक नहीं, इसलिए आटो चालकों को प्रशासन की बात मान लेनी चाहिए।
प्रशासन द्वारा निर्धारित किराए पर आटो चलने से लोगों को भी राहत मिलेगी और वे आटो का उपयोग करेंगे। श्याम पंजवानी का कहना है कि स्टेशन से उतरकर मोपका, चकरभाठा, सेंदरी, पावर हाउस, कोनी आदि जगहों पर जाने के लिए सीधे कोई साधन नहीं था। सिटी बस चलने से यह परेशानी दूर हो गई। साथ ही आटो व रिक्शा वालों से देर तक मोलभाव करने का भी टेंशन खत्म हो गया है।
यूनिवर्सिटी में एमसीए की छात्रा परिणीता बिठालकर व स्वाति पवार का कहना है कि सिटी बस चलने से छात्र-छात्राओं को अब यूनिवर्सिटी जाने में कोई परेशानी नहीं होती। आने-जाने के लिए 15 मिनट में बस की उपलब्धता से और ज्यादा आसानी हो गई है। पहले यूनिवर्सिटी की बस नहीं छूट जाने के बाद निजी बसों में जगह नहीं मिलती थी।