नई दिल्ली
आर्थिक सर्वेक्षण 2007-08 से अगर बजट का कुछ अनुमान लगाया जाए तो वित्त मंत्री पी चिदंबरम केंद्रीय बिक्रीकर में कटौती कर सकते हैं और आयकर में छूट दे सकते हैं।
क्या हो सकता है :
केंद्रीय बिक्रीकर की दर ३ फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दी जाएगी। आयकर में रियायत का सपना पूरा हो सकता है।
क्या हैं कारण :
सर्वे में कहा गया है कि केंद्र बिक्रीकर में सुधार का कार्यक्रम जारी रखेगी। इसके तहत नए वित्त वर्ष में केंद्रीय बिक्रीकर की दर 1 फीसदी घटाकर 2 फीसदी कर दी जाएगी।
सरकार गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) की दिशा में आगे बढ़ने के उपाय करेगी। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2007-08 के दौरान कर संग्रह में रिकार्ड इजाफा हुआ है। टैक्स और जीडीपी का अनुपात ११ फीसदी तक पहुंच गया है।
प्रत्यक्ष टैक्स की कुल राजस्व में हिस्सेदारी 50 फीसदी को पार कर गई है। इस मामले में भारत विकसित देशों के क्लब में शामिल हो गया है। ऐसे में टैक्स रियायतों की उम्मीद करना गलत नहीं होगा। कयास हैं कि वित्त मंत्री सेक्शन 80सी के तहत टैक्स बचत की सीमा 1 लाख रुपए से बढ़ा सकते हैं, आयकर सरचार्ज समाप्त कर सकते हैं और आयकर संबंधी बचत के लिए और अधिक निवेश अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।
सर्विस टैक्स का विस्तार
वेट का प्रयोग सफल रहा है। राज्यों के राजस्व संग्रह में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। वित्त मंत्री पेट्रोल जैसे विवादास्पद कमॉडिटी पर वेट की पहल कर सकते हैं। सर्विस टैक्स के दायरे का विस्तार भी उनके एजेंडे में है।
देखना होगा कि राजनीतिक अपेक्षाओं के मद्देनजर वह किन नई सेवाओं को सर्विस टैक्स के दायरे में शामिल करते हैं। आम लोगों को प्रभावित करने वाली सेवाओं पर टैक्स लगाने की जिम्मेदारी उन्होंने राज्यों के पाले में डाल दी है।