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प्रबंधन को दोषी ठहराया

ग्वालियर. अल्पकालीन महिला आवास गृह से रहने वाली दो दर्जन युवतियों में से चार युवतियों के भागने के मामले में संस्था के प्रबंधन को दोषी माना गया है। इस मामले की प्रशासकीय जांच के लिए बनी कमेटी ने इस बात की पुष्टि की है। दोषी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। जांच दल के सामने आवास गृह में रहने वाली युवतियों ने प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

पांच माह पहले 14 सितंबर को चार युवतियां पूजा दांगी, सपना माथुर, नीतू शर्मा व शारदा मौका पाकर आवास गृह से भाग गईं थीं। इसकी जांच के लिए बनी समिति ने 22 फरवरी को रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्था प्रबंधन द्वारा सुरक्षा की उचित व्यवस्था न करने के कारण ही युवतियां भागी थीं। घटना वाले दिन अधीक्षिका साप्ताहिक अवकाश पर थीं, पर संस्था ने किसी अन्य की व्यवस्था नहीं की। एक भृत्या कुसुमलता डच्यूटी पर थी, पर उसे आंखों से कम दिखाई देता है। तीन सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट से इस बात का तो खुलासा हो ही गया है कि आवास गृह में रहने वाली अधिकांश अंत:वासिनियों को देर रात तक जागना पड़ता है। प्रबंधन पर ये लगे थे आरोप

1 संस्था में शाम के समय 20 से 24 साल उम्र के कुछ लोग आते हैं और मैडम से बातें करते हैं। इसके बाद कुछ युवतियां उनके साथ चली जाती हैं।

2.संस्था में गलत काम कराए जाते हैं।

3.अधीक्षिका द्वारा मारपीट की जाती है।

जांच में हकीकत का खुलासा

तीन सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट से इस बात का तो खुलासा हो ही गया है कि आवास गृह में रहने वाली अधिकांश अंत:वासिनियों को देर रात तक जागना पड़ता है। इसका कारण रात एक बजे के बाद नल से पानी आना है।





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