जयपुर. राज्य विधानसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के विधायक संयम लोढ़ा के प्रीपीजी परीक्षा के परिणाम में लेन-देन का आरोप लगाने पर हंगामा हो गया। लोढ़ा का कहना था कि परीक्षा में 50 फीसदी आरक्षण सेवारत डॉक्टरों को मिला हुआ है।
इस परीक्षा के परिणाम के बाद नियमों में फेरबदल कर लेनदेन से किन्ही लोगों को फायदा पहुंचाया है। संसदीय मंत्री राजेन्द्र राठौड़, शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ मुख्य सचेतक महावीर प्रसाद जैन ने इसका विरोध किया।
उनका कहना था कि बिना सबूत के आरोप लगाए गए हैं। इसे रोका जाना चाहिए। प्रतिपक्ष के नेता हेमाराम चौधरी, डा. सी.एस. बैद का भी कहना था कि परीक्षा परिणाम के बाद नियमों में फेरबदल नहीं किया जा सकता।
चिकित्सा मंत्री नरपतसिंह राजवी का कहना था कि 21 जनवरी 08 को प्रीपीजी परीक्षा हुई थी। इसमें सिर्फ 6 डॉक्टर ही उत्तीर्ण हुए। हाईकोर्ट के आदेश के कारण मापदंड बदले गए है। सिर्फ उन्हीं डॉक्टरों को इसका लाभ दिया है जो 4-5 साल से ग्रामीण इलाकों में सेवारत थे। लोढा का कहना था कि मंत्री गलत जानकारी दे रहे हैं। हाईकोर्ट का आदेश अजा जजा के लिए था।