लंदन. ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मासूमियत के प्रति दिल का उमड़ आना नहीं, बल्कि एक दिमागी गतिविधि है। ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि किसी मासूम बच्चे पर नजर पड़ते ही हमारे दिमाग का एक खास हिस्सा एक्टिव हो जाता है।
ह्यूमन ब्रेन के इस हिस्से को मीडियल ऑबीर्टोफ्रंटल कॉटेर्क्स कहते हैं। जब भी हमारी आखें किसी अनजान बच्चे को देखती हैं, यह हिस्सा सेकंड के सातवें हिस्से में ही एक्टिव हो जाता है। लेकिन ये महज बच्चों के ही मामले में होता है। रोजमर्रा की जिंदगी में अनजान लोगों को देखने पर ऐसा लाड़ और अपनापन कभी नहीं उमड़ता कि उन्हें एकटक देखते जाने का मन करे।
रिसर्चरों ने इस रिजल्ट तक पहुंचने के लिए न्यूरो इमेजिंग मेथड का इस्तेमाल किया। बच्चों के चेहरों को देखने के बाद होने वाली प्रतिक्रिया की वजह जानने के लिए एक माइंड गेम तैयार किया गया। इसमें ऑब्जर्वर को एक छोटे रेड क्रॉस का कलर नोटिस करना था यानी जैसे ही कलर बदले, बटन दबा दिया जाए। इस एक्टिविटी के दौरान ही बीच में महज 0.3 सेकंड के लिए स्क्रीन पर किसी अडल्ट या बच्चे की शक्ल भी दिखाई जाती थी, इसका टास्क से कोई संबंध नहीं था। रिसर्चरों ने पाया कि बच्चों के चेहरे देखने पर नॉर्मल तरीके से काम कर रहा दिमाग जल्द एक्टिव हो जाता है, जबकि अडल्ट चेहरों को देखने पर दिमाग धीमा रिस्पांस देता है।
इस स्टडी से जुड़े लीड रिसर्चर एलन स्टीन के मुताबिक इससे मां बनने वाली महिलाओं के इलाज में मदद मिलेगी। ब्रिटेन में तकरीबन 13 फीसदी महिलाएं डिलिवरी के बाद डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं। शायद अपनी आंखों के तारे की तोतली हरकतें देखकर तनाव दुलार में बदल जाए।