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दो मिनट की जांच में लगते हैं दो दिन

बीकानेर. संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल की केन्द्रीय प्रयोगशाला में रक्त जांच में काम आने वाली कम्पलीट ब्लड काउंट मशीन (सीबीसी) पिछले छह महीने से खराब पड़ी है। केन्द्रीय प्रयोगशाला में रक्त की जांच का काम मैन्युअली हो रहा है।

अस्पताल में प्रतिदिन औसत सौ रोगियों के रक्त के सेम्पल संग्रहीत किए जाते हैं। केन्द्रीय प्रयोगशाला संबंधी रक्त के सेम्पल वहीं रख लिए जाते हैं। जांच विशेष से संबंधित सेम्पल बायोकेमेस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजे जाते हैं।

बायोकेमेस्ट्री संबंधी जांचें अस्पताल में ही होती है, जबकि माइक्रोबायोलॉजी विभाग सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में होने के कारण उससे संबंधित रक्त के सेम्पल कॉलेज भेजने की व्यवस्था है। अस्पताल में सीबीसी मशीन के खराब होने के कारण रक्त की जांच का काम कछुआ गति से चल रहा है।

डॉक्टर रोगी से जांच रिपोर्ट त्वरित लाने का कहते हैं लेकिन अस्पताल में रिपोर्ट दोपहर दो बजे बाद मिलती है। तब तक डॉक्टर चला जाता है। यही कारण है कि अधिकांश जांचें बाहर निजी लैब से हो रही हैं। दोपहर 12 बजे के बाद प्रयोगशाला में रक्त के सेम्पल भी नहीं लिए जाते।

माइक्रोबायोलॉजी में होने वाली जांच के रक्त सेम्पल प्रयोगशाला से 12.30 बजे ही कॉलेज भेज दिए जाते हैं। उसके बाद पहुंचने वाले रोगी को स्वयं सेम्पल लेकर कॉलेज जाना पड़ता है। मशीन की खराबी के कारण पिछले छह माह से व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है।

दो मिनट में जांच
सीबीसी मशीन से कई नमूनों की जांचें एक साथ होती है और जांच में मात्र दो मिनट लगते हैं। रक्त सेम्पल लेने के बाद रोगी को आधे घंटे से भी कम समय में रिपोर्ट भी मिल जाती है लेकिन मशीन खराब होने के कारण रोगियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

प्रयोगशाला में रक्त जांच का शुल्क 50 रुपए वसूला जाता है, जबकि निजी लैब में उसी जांच के 60 से 80 रुपए तक वसूले जाते हैं। कॉलेज में होने वाली गंभीर रोगों की जांच के शुल्क तो इससे भी कहीं अधिक हैं। अस्पताल में मैन्युअली होने वाल जांच की विश्वसनीयता पर भी संदेह रहता है। चिकित्सक स्वयं रोगियों को बाहर की किसी अच्छी लैब से जांच करवाने की सलाह देते हैं।

ये हैं जांचे
सेंट्रल लैब: एच, टीएलसी, डीएलसी, ईएसआर, एबीओआरएच, पीटी, यूरिन, सीबीसी, पीबीसी व एमपी, प्लेटलेट आदि।

बायोकेमेस्ट्री लैब: शूगर, यूरिन, लीवर, प्रोटीन, कोलेस्ट्रोल, ग्लूकोज, सोडियम पोटेशियम, पसलियों में पानी तथा पीलिया आदि।

माइक्रोबायोलॉजी: यौन रोग, ब्लड इंफेक्शन, थायराइड, पशु जनित रोग (ब्रुसेला), गर्भ गिरना, ब्लड इंफेक्शन, एड्स पीलिया, डेंगू, मलेरिया तथा टाइफाइड आदि।

>> पुनर्वास केन्द्र का दरवाजा पशुओं की समस्या को कारण बंद किया गया था। शीघ्र ही उचित व्यवस्था करके उसे वापस खोल दिया जाएगा।
एस.जी.सोनी, प्रभारी, राजकीय

सेटेलाइट अस्पताल
>> सीबीसी मशीन के खराब होने पर जांचें कैंसर विभाग में स्थापित मशीन से की जाती हैं। यदि मशीन लंबे समय से खराब है तो नई मशीन खरीदी जाएगी। रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ने से मैन्युअली जांच में समय लगता है। रोगियों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
डॉ. डी.पी.पूनिया, प्राचार्य, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज





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