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एशियाई बंदरों में मिला एड्स प्रतिरोधी जीन्स

वाशिंगटन. हावर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसंधानकर्ताओं ने एशियाई बंदरों में मौजूद एक ऐसे जीन्स की खोज की है जिसके एचआईवी समूह के वायरस ‘लेंटीवायरस’ के प्रतिरोधक के रूप में विकसित होने की संभावना है।

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार ‘टीआरआईएम5-सीवाएपीए’ दो जीन्स ‘टीआरआईएम5’ और ‘सीवाएपीए’ का मिलाजुला रूप है। इनके मेल से एक खास किस्म का प्रोटीन पैदा होता है जो एचआईवी से संबंधित ‘लेंटीवायरस’ के सं•्र मण से लड़ने की क्षमता पैदा करता है।

पत्रिका ‘पीएलओएस पैथोजेन्स’ के ताजा अंक में प्रकाशित इस अध्ययन से यह बात स्पष्ट हो गई है एचआईवी सं•्रमण से होनी वाली लाइलाज बीमारी एड्स कोई नई महामारी नहीं है।

गौरतलब है कि जीव विज्ञानियों ने पहले भी इस तरह के एक जीन्स टीआरआईएम-सीवाएपीए की खोज की थी। हालांकि उनका कहना है कि यह दोनों जीन्स अलग-अलग परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से विकसित हुए हैं।





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