जोधपुर. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा कि निजी कंपनी के लिए सरकार किसानों की भूमि अवाप्त नहीं करे बल्कि वह इस दिशा में विचार करे कि इस समस्या को कैसे सुलझा सकती है? वेंक्कया नायडू की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट में दिए गए प्रपोजल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे न तो बाड़मेर और ना ही नंदीग्राम की बात कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि जो परिवार अपनी भूमि को खुशी से भी बेचता है तो वह उस पैसे को बचा कर नहीं रख पाता।
इसके लिए उसको मार्गदर्शन की जरूरत होती है। इसके साथ ही वहां स्थापित होने वाले प्रोजेक्ट में किसान का भी शेयर हो ताकि वह सुरक्षित रह सके। अरुण शौरी ने शनिवार को यहां भाजपा के उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन सत्र के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि गाइड लाइन के अभाव में विनिवेश की गाड़ी पटरी से उतरी हुई है।
यह समस्या तो मामूली है क्योंकि इसमें बदलाव नहीं हो रहे हैं, लेकिन बजट में वित्त मंत्री ने जो सपने दिखाए हैं इसका उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। यूपीए सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उसका इरादा सिर्फ सता में रहने का है। इसलिए बजट में प्रतिबद्धता नहीं है।
कर्ज माफी की घोषणा
हवाई ख्वाब
किसानों को सब्सिडी देने के मसले पर उन्होंने कहा कि किसानों के आत्महत्या के पीछे सबसे प्रमुख कारण जिला प्रशासन की अनदेखी है। बजट में किसानों के 60 हजार करोड़ के कर्जे माफ करने की घोषणा को मात्र हवाई ख्वाब बताते हुए कहा कि यह पैसा किसानों तक पहुंचेगा या नहीं, इसकी आशंका खुद वित्त मंत्री को भी है। उन्होंने कृषि में और शोध की आवश्यकता जताते हुए कहा कि हमें परम्परागत तरीकें को बदलना होगा। चावल व गेहूं की पैदावार पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय अन्य फसलों पर भी फोकस करना चाहिए।