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देशभक्ति पर भारी कॉपरेरेट की चमक

जोधपुर. बच्चों के कैरियर और पुराने सिस्टम से ऊबकर कॉपरेरेट सेक्टर में मोटी तनख्वाह व सुविधाओं से आकर्षित होकर ऑफिसर सेना, वायुसेना व बीएसएफ का साथ छोड़ने लगे हैं। मामूली तनख्वाह का परिणाम या जोशीले कैरियर के प्रति घटता आकर्षण कहें, युवाओं का रुझान रक्षा सेवाओं के प्रति तेजी से घट रहा है।

सेना व वायुसेना में करीब 12-12 हजार ऑफिसरों के पद रिक्त हैं। इसके बावजूद हजारों अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने के आवेदन दे रखे हैं। इससे डिफेंस सर्विसेज के उच्च अधिकारियों और सरकार की चिंता और बढ़ गई है। कभी सेना में भर्ती के लिए युवा लालायित रहते थे। अब आलम है कि हजारों पद रिक्त हैं, मगर उसके मुकाबले अधिकारी भर्ती नहीं हो पा रहे।

सेना, वायुसेना व सीमा सुरक्षा बल में भर्ती होने वाले अधिकारियों के लिए परिवार से दूर रहकर कश्मीर घाटी में आतंकवादियों, त्रिपुरा में उल्फा उग्रवाद और लेह-लद्दाख, सिक्किम व रेगिस्तान की विषम परिस्थितियों में नौकरी करने वाले अधिकारियों के पास पहले अधिक विकल्प नहीं थे। आतंकवाद से प्रभावित कश्मीर घाटी में सेना के अधिकारी सबसे अधिक शहीद हुए, मगर जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से वीरता के लिए मिलने वाला वजीफा प्रति महीने मात्र 12 से 28 रुपए है।

आश्रितों के वजह से मोह भंग: कारगिल युद्ध के बाद शहीद अधिकारियों के परिवारों के सामने पेट्रोल पंप से लेकर अन्य परिलाभ के मामले में आईं दिक्कतों और कम तनख्वाह की पीड़ा ने सैन्य अधिकारियों के कदम कॉपरेरेट जगत की ओर बढ़ाने लगे। बच्चों के भविष्य की चिंता परिवारिक समस्या और सेना का एक ढरेर्ं पर चलने वाले सिस्टम से बाहर निकलने को लालायित पिछले तीन सालों में हजारों की तादाद में कर्नल, मेजर, कमांडर, कमांडेट व डिप्टी कमांडेट स्तर के अधिकारियों ने नौकरी छोड़ दी।

कॉपोरेट कंपनियों की दिलचस्पी

कंपनियां भी डिफेंस के अनुशासित, दक्ष, कुशल व अच्छे प्रबंध जानने वाले अधिकारियों को चार से पांच गुना अधिक तनख्वाह देकर अपने साथ जोड़ने में दिलचस्पी दिखाती हैं।

कितनी मिलती है सेना में तनख्वाह

कैप्टन- बेसिक 8 हजार, मकान किराए भत्तों सहित 20 हजार
मेजर- बेसिक 12 हजार, भत्तों सहित 27 हजार
कर्नल- बेसिक 16 हजार, भत्तों सहित 35 हजार

सशस्त्र सेनाओं को मिलगा बेहतर वेतन -एंटोनी

रक्षामंत्री एके एंटोनी भी मानते है कि बेहतर वेतन व सुविधाएं नहीं मिलने की वजह से अधिकारी कॉपोरेट जगत की तरफ आकर्षित हो रहे है। बीते सप्ताह लोंगेवाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान छठा वेतन आयोग में सशस्त्र सेनाओं के लिए बेहतर वेतन पैकेज होने के संकेत दिए थे। उन्होने कहा कि बेहतर वेतन व सुविधाएं नहीं मिलेगी तो युवाओं का सेना के प्रति रूझान नहीं बढ़ेगा।

ज्ञात रहे एवीएस (अजयविक्रमसिंह) कमेटी की सिफारिशों के आधार पर वेतन व पदोन्नति के बारे में तीनों सेनाओं के मुखियाओं से रिपोर्ट मांगी गई थी। रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी और उस पर संभवत इसी बजट सत्र में अमल कर दिया जाएगा।

सेना में 27 साल नौकरी करने के बाद चार गुना अधिक तनख्वाह पर अब दुबई में लैंडमार्क कंपनी में प्रोजेक्ट इंचार्ज पद पर कार्यरत हूं। सेना का माहौल और क्वालिटी ऑफ लाइफ लाजवाब थी, मगर बच्चों के भविष्य के लिए नौकरी छोड़ने का फैसला लेना पड़ा। उनकी राह को इस बहुराष्ट्रीय कंपनी ने आसान कर दिया।
कर्नल जय सेनगुप्ता,प्रोजेक्ट इंचार्ज, लैंडमार्क कंपनी,दुबई।

नेवी की सुविधाएं और तौर तरीकों की किसी से तुलना नहीं हो सकती, परिवारिक समस्या और कॉपरेरेट जगत के प्रति बढ़ते आकर्षण से मैंने ही नहीं, मेरे बैच के कमोबेश सभी साथियों ने दूसरी कंपनियां ज्वाइन कर ली हैं।
नेवी के पूर्व कमांडर एस के नरेश, सत्यम कंप्यूटर, रीजनल हैड, हैदराबाद।

सात महीने पहले नौकरी छोड़ रिलांयस से नाता जोड़ा है। परिवार से दूर नौकरी करना और बच्चों के भविष्य के लिए एक स्थाई जगह रहने की जरूरत महसूस हो रही थी। कॉपरेरेट जगत की तुलना में तनख्वाह भी कम थी, इसलिए सेना की नौकरी छोड़ दी। आज अपने परिवार के साथ तीन गुना अधिक तनख्वाह पाकर काफी खुश हूं।
कर्नल के एस कदम, डीजीएम, रिलायंस, पुणो।

एमबीए करने के बाद बीएसएफ में देशभक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा लेकर साढ़े आठ साल पहले भर्ती हुआ, लेकिन बीएसएफ में टैलेंट का सही उपयोग नहीं होने, कॉपरेरेट की तुलना में कम तनख्वाह और सिस्टम में खराबी से दिल भर गया। गत 31 दिसंबर को नौकरी छोड़ दुगुनी तनख्वाह में आशियाना ग्रुप ज्वाइन किया है।
राजेश यादव, पूर्व डिप्टी कमांडेंट, बीएसएफ।

तो कैसे दिलाता बच्चों को शिक्षा

पच्चीस साल सेना में नौकरी करने के बाद पिछले साल विदाई लेकर मैंने डीएलएफ कंपनी ज्वाइन की। आज मैं हर महीने एक लाख रुपए से अधिक तनख्वाह पा रहा ह्रूं। अब बच्चों की बेहतर शिक्षा व अन्य प्रबंध कर सकता हूं।
—कर्नल क्लिफटन,चीफ इंजीनियर, डीएलएफ कंपनी, मुंबई

आठ महीने पहले सत्यम कंप्यूटर में जनरल मैनेजर का पद संभाला है। सेना की नौकरी ‘अल्टीमेट’ है। परिवार के साथ रहने की चाहत और कम वेतन,भत्तों के कारण यह कदम उठाया।
—कर्नल विश्वास पुनिया, सत्यम कंप्यूटर,पुणो





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